27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Bhaiya Dooj : भाई दूज पर बहनों के घर जाकर ही करना चाहिए भोजन, अकाल मृत्यु का टलता है खतरा

- भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाता है- यमदेवता की पूजा अकाल मृत्यु से बचाती है- अकाल मौत से बचाने के लिए बहनों के घर जाकर भाई को भोजन करना चाहिए

2 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Hariom Dwivedi

Nov 15, 2020

bhai_dooj.jpg

यमदेवता के अपनी बहन के घर जाने के प्रतीकस्वरूप प्रत्येक घर का पुरुष अपने ही घर पर पत्नी द्वारा बनाए गए भोजन का न सेवन कर बहन के घर जाकर भोजन करता है

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. भाई दूज (Bhaiya Dooj) को 'यमद्वितीया' के नाम से भी जाना जाता है। असामायिक मृत्यु यानी अकाल मौत (Premature Death) से बचने के लिए इस दिन यम देवता का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भूलोक में यम तरंगें अधिक आती हैं और यम आदि देवताओं के लिए निमित्त किया गया कोई भी कर्म कम समय में ही फलित होता है। सनातन संस्थान के मुताबिक, यम तरंगों के कारण प्राणियों को कई तरह के कष्ट हो सकते हैं। जैसे- अपमृत्यु होना, दुर्घटना होना, स्मृतिभ्रंश होने से अचानक पागलपन का दौरा पड़ना, मिरगी समान दौरे पड़ना अर्थात फिट्स आना अथवा हाथ में लिये हुए कार्य में अनेक बाधाएं आना। इन विपत्तियों से बचने के लिए कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि पर यमदेव का पूजन करते हैं।

पृथ्वी यम की बहन का रूप है। इस दिन यम तरंगें पृथ्वी की कक्षा में आती हैं। इसलिए पृथ्वी की कक्षा में यमतरंगों के प्रवेश के संबंध में कहते हैं कि कार्तिक शुक्ल द्वितीया की तिथि पर यम अपने घर से बहन के घर अर्थात पृथ्वी रूपी भूलोक में प्रवेश करते हैं। इसलिए इस दिनको यम– द्वितीया के नाम से जानते हैं। यमदेवता के अपनी बहन के घर जाने के प्रतीकस्वरूप प्रत्येक घर का पुरुष अपने ही घर पर पत्नी द्वारा बनाए गए भोजन का न सेवन कर बहन के घर जाकर भोजन करता है। बहन द्वारा यम देवता का सम्मान करने के प्रतीक स्वरूप यह दिन 'भैय्यादूज' के नाम से भी प्रचलित है।

ऐसे करें भाई की पूजा

इस दिन भोजन से पूर्व बहन भाई की पूजा करती है। इसमें वह प्रथम भाई को कुमकुम तिलक एवं अक्षत लगाती है। इसके बाद भाई के मुख के चारों ओर अर्धगोलाकार आकृति में तीन बार सुपारी एवं अंगूठी घुमाती है। इसके उपरांत अर्धगोलाकार में तीन बार आरती उतारती है। औक्षण करने के लिए उपयोग में लाए गए तेलके दीप में ईश्वरीय शक्तिका प्रवाह आकर्षित होता है। औक्षण करते समय दीप को अर्धगोलाकार घुमाने से दीप के सर्व ओर शक्तिका कार्यरत वलय उत्पन्न होता है । इस वलयद्वारा शक्ति की कार्यरत तरंगें भाई की ओर प्रक्षेपित होती हैं। भाई की सूर्यनाडी कार्यरत होती है तथा उसमें शक्ति का वलय उत्पन्न होता है । भाईकी देह में शक्ति के कणों का संचार होता है तथा उसकी देहके सर्व ओर सुरक्षाकवच बनता है ।

यम तरंगों से परिजनों की होती है रक्षा

इस दिन बहनें भाई के रूपमें यमदेव का औक्षण कर उनका आवाहन कर पितृलोक की अतृप्त आत्माओं को प्रतिबंधित करने के लिए उनसे प्रार्थना करती हैं। इस प्रकार परिजनों को यम तरंगों के कारण होने वाले कष्ट घटते हैं। यम तरंगों से परिजनों की रक्षा होती है। वास्तु का वायुमंडल शुद्ध बनता है। पृथ्वी का वातावरण सीमित समय के लिए यातना रहित अर्थात आनंददायी रहता है। औक्षण के उपरांत भाई बहन के हाथ से बना भोजन ग्रहण करता है। ऐसा बताया गया है कि सगी बहन न हो तो भाईदूज के दिन चचेरी, ममेरी किसी भी बहन के घर जाकर अथवा किसी परिचित स्त्री को बहन मानकर उसके घर भोजन करना चाहिए। भोजन के उपरांत भाई को यथाशक्ति वस्त्राभूषण, द्रव्य इत्यादि का उपहार देकर बहन का सम्मान करना चाहिए।