सपा के पूर्व मंत्रियों, सांसदों, विधायकों को बड़ी तादात में पार्टी में शामिल करके भाजपा ने सपा की बेचैनी बढ़ा दी है। यहां तक कि अखिलेश यादव को दो हजार के नोटो की याद आ गई। लोकसभा चुनाव के पहले ही मनोवैज्ञानिक तौर पर सपा को पराजित करने का भाजपाई सेक्रेट प्लान क्या है।
BJP SP: साल 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा यूपी में 14 सीटों पर हार गई थी। लेकिन अब 80 के 80 सीटों पर जीतने का दावा करने वाली पार्टी विरोधियों के खेमें में सेंध लगा चुकी है। लोकसभा चुनाव के पहलेे ही सपा, बसपा की मनोवैज्ञानिक पराजय की स्थिति बना दे रही है, जिससे जनता में भी भाजपा के अपराजेय होने का संदेश जा रहा है। पार्टी ने उन 14 लोक सभा क्षेत्रों पर अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है जहां उसे पराजय मिला है। इसके लिए नेताओं की वापसी से लेकर जातिय समीकरणों को साधने और संगठन में फेरबदल सबकुछ किया जा रहा है।
किन सीटों पर भाजपा ने बनाया मास्टर प्लान
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 80 में 62 सीटें जीती थी। उसके सहयोगी दल अपना दल ने मिर्जापुर और रार्बटसगंज की लोक सभा सीटे जीत ली थी जबकि बाकी 16 सीटें विपक्ष के पास चली गई थी। हांलाकि दो सीटे फिर भाजपा ने उपचुनावों में जीत लिया था। अब 14 उन सीटों पर भाजपा की नजर है जहां सपा, बसपा या कांग्रेस काबिज है। जिसमें बिजनौर, नगीना, सहारनपुर, अमरोहा, संभल, मुरादाबाद, मैनपुरी, श्रावस्ती, अंबेदकरनगर, गाजीपुर, घोसी, जौनपुर, लालगंज शामिल है। हांलाकि उपचुनाव में जीती गई दो सीटे आजमगढ़ और रामपुर को भी भाजपा पूरी गंभीरता से ले रही है।
सपा नेताओं को शामिल करने का मतलब
मुरादाबाद और सहारनपुर मंडल में सैनी बिरादरी की संख्या काफी अधिक है। भाजपा की हारी हुई सीटे इन्हीं मंडलों में हैं। पार्टी ने सपा के पूर्व मंत्री साहिब सिंह सैनी और पूर्व सांसद राजपाल सैनी को पार्टी में शामिल करके समाजवादी पार्टी की नींद उड़ा दिया है। इसी तरह पूर्वांचल के जिलों के लिए दारासिंह चौहान और ओमप्रकाश राजभर को पार्टी में शामिल करने के बाद पूर्व मंत्री जगदीश सोनकर, सुषमा पटेल, सपा के पूर्व विधायक गुलाब सोनकर को पार्टी में शामिल करके पूर्वांचल की अपनी हारी हुई सीटों पर स्थिति को मजबूत कर लिया है, तो वहीं सपा और बसपा की चिंताएं बढ़ा दी है।
इसी हफ्ते बदले जाएंगे 35 जिला अध्यक्ष
पार्टी ने सांगठनिक फेरबदल करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। प्रदेश के 35 जिलों के जिला अध्यक्षों को बदले जाने की लिस्ट भी तैयार की जा रही है। इसमें वह जिला अध्यक्ष शामिल किए गए हैं जिनके खिलाफ कार्यकर्ताओं की शिकायतें थी या निकाय चुनावों में प्रदर्शन से पार्टी संगठन संतुष्ट नहीं है।