रौब और रौले से जुड़ी है ‘नीली बत्ती’ की कहानी, अधिकारी करते हैं अपनी ही मनमानी
सिर्फ प्रोटोकॉल और रौब के खातिर ही ऐसा किया जता है। केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली 108 के तहत इन अधिकारियों को गाड़ियों के ऊपर बत्ती लगाने का अधिकार नहीं है।
लखनऊ। कोर्ट में इन्साफ की देवी की प्रतिमा पर काली पट्टी का बधा होना यह दर्शाता है कि कानून सबके लिए बराबर है। पर हकीकत में देखें तो ऐसा नज़र नहीं आ रहा। राजधानी में लगातार बढ़ रही अपराधिक घटनाओं पर नकेल कसने और कानून व्यवस्था सुधारने के चलते राज्य सरकार सख्ती करती है।
झूठी शान और धौंस पर लखनऊ पुलिस नकेल कसने का प्रयास कर रही है। इसके मद्देनज़र अभियान चलाकर लाल बत्ती और हूटर के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है। इससे जनता के बीच एक अच्छा सन्देश भी जा रहा है, लेकिन कमाल की बात यह है कि नगर निगम के आला अधिकारियों का नीली बत्ती के प्रति मोह अभी भी खत्म नहीं हो रहा है। दरअसल नगर निगम के आला अधिकारियों की सरकारी गाड़ियों पर नीली बत्ती सजी है। केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली 108 के तहत इन अधिकारियों को गाड़ियों के ऊपर बत्ती लगाने का अधिकार नहीं है। पत्रिका ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
गौरतलब है कि इन अधिकारियों को जानकारी है कि इनकी गाड़ियों पर सजी बत्तियां अवैध हैं। एक अधिकारी से जब इस विषय में अनौपचारिक रूप से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि 'कि जब आपको पता ही है तो पूछ क्यों रहे हैं।' एक बार फिर इस मुद्दे पर अन्य लोगों से बात की गयी।
क्या कहते हैं जानकार -
पूर्व नगर आयुक्त और पीसीएस संग के अध्यक्ष रह चुके बाबा हरिदेव सिंह ने कहा कि अधिकारियों को इस पर खुद चिन्तन करना चाहिए। सिर्फ प्रोटोकॉल और रौब के खातिर ही ऐसा किया जाता है। उन्होंने सोचना चाहिए कि उनकी पहचान उनके काम से होगी न की नीली बत्ती लगाने से।
चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर प्रशांत शर्मा ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में है। इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए सम्बंधित अधिकारियों को जांच कर उचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
एसपी ट्रैफिक हबीबुल हसन ने कहा कि यदि उनका नाम सूची में नहीं है तो यह गलत है। ऐसी स्थिति में उनपर कार्यवाही अवश्य होनी चाहिए।
आरटीओ लक्ष्मीकांत मिश्रा ने कहा कि ऎसी स्थिति में अभियान चला कर इस पर कार्यवाही की जा सकती है।
बताते चलें कि अखिलेश यादव पर लाल बत्तियां बांटने को लेकर विरोधी दल आरोप पहले ही लगाते रहे हैं और ऊपर से उनके यह अधिकारी। पिछली बार भी सम्बंधित अधिकारियों ने कार्यवाही करने की बात कही थी। पर अभी तक किसी प्रकार की कार्यवाही देखने को नहीं मिली है। देखना होगा कि इस बार अधिकारी अपने दावों पर खरे उतारते हैं या उनके दावे पहले की तरह ही खोखले साबित होते हैं।
परिवाहन विभाग द्वारा दी गयी सूची में इनको है नीली बत्ती लगाने का अधिकार
अध्यक्ष राजस्व परिषद
औद्योगिक विकास आयुक्त
कृषि उत्पादन आयुक्त
समस्त प्रमुख सचिव
समस्त पुलिस निदेशक
मण्डलायुक्त
क्षेत्रीय पुलिस निरीक्षक
परिक्षेत्रीय पुलिस उपमहानिरीक्षक
जनपद न्यायाधीश एवं उनके समकक्ष उच्चस्तर न्यायिक सेवा के अधिकारीगण