
bukkal nawab
लखनऊ. दो साल पहले का वक्त याद कीजिये। हुसैनाबाद क्षेत्र के रहने वाले बुकक्ल नवाब समाजवादी पार्टी के मुस्लिम चेहरे हुआ करते थे। वे मुलायम सिंह के बेहद करीबी माने जाते थे। हिंदुत्व और राम मंदिर समेत तमाम मुद्दों पर जी भर के कोसते थे। धर्मनिरपेक्ष भारत की वकालत करते थे ,लेकिन सपा राज जाते ही ये पंथनिरपेक्ष की बोली बोलने लगे। ये यही तक नहीं रुके। भाजपा के लिए इन्होने अपनी विधान परिषद् की सीट कुर्बान कर दी। तकरीबन 7 महीने बाद योगी आदित्यनथ ने इनकी कुर्बानी का सिला चुकाया और इन्हे फिर से विधान परिषद् के लिए नामित कर दिया। नाम ऐलान के 24 घंटे बाद ही बुकक्ल नवाब ने अपने पारम्परिक वेशभूषा उतार भगवा चोला ग्रहण कर लिया। वे मंगलवार को हज़रतगंज स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में दर्शन करने पहुंचे। उन्हें भाजपा एमएलसी चुनाव में प्रत्याशी बनाकर रिटर्न गिफ्ट दे चुकी है और सोमवार को उन्होंने नामांकन पत्र भी दाखिल किया था।
चढ़ाया 20 किलो का घंटा
दर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि राम मंदिर अयोध्या में जरूर बनेगा। जहां भगवान राम विराजमान थे मंदिर निर्माण वहीं होगा। इतना कहने के साथ बुकक्ल ने 20 किलो का घंटा भी चढ़ावे के रूप में मंदिर पुजारी को दिया।
बुक्कल नवाब ने बातचीत में कहा कि उनका परिवार हनुमान भक्त रहा है। उन्होंने कहा कि वे दावे के साथ कह सकते हैं कि उनके पूर्वजों ने ही अलीगंज में हनुमान मंदिर भी बनवाया था।
हालाँकि ये पहली बार नहीं है कि बुकक्ल नवाब ने अयोध्या मामले पर कुछ बयान दिया हो। इससे पहले सूबे में सरकार बदलते ही इनके हुसैनाबाद स्थित निर्माण पर सीलिंग की कार्रवाई हुई थी। बदले में बुकक्ल ने प्रेस कांफ्रेंस कर राम मंदिर निर्माण में सहयोग देने की बात कह दी थी। इसके लिए उन्होंने कहा कि सरकार से 30 करोड़ मुआवज़ा मिलना है जिसमें से 15 करोड़ वे मंदिर निर्माण में देंगे। इसके अतिरिक्त वे 10 लाख रूपए भी देंगे।
वहीं दिखावे की राजनीति करने के विपक्षियों के आरोपों पर उन्होंने कहा कि विपक्ष तो कहता रहेगा। आरोप लगाना उनका काम है। वे कभी हमारे काम की तारीफ तो नहीं करेंगे।
अवैध निर्माण बचाने के चलते हुए थे भाजपा में शामिल !
डेढ़ साल पहले करीब 4000 वर्ग फुट जमीन पर भूतल सहित चार मंजिला अपार्टमेंट बनाया गया है। बुकक्ल के बेटे फैसल नवाब (पार्षद) ने सरकारी जमीन पर एकल आवासीय मानचित्र पास कराकर अपार्टमेंट बनवा लिया था। उन्होंने 3 मंजिल का नक्शा पास कराया था और एक मंजिल अनाधिकृत बनाया था। उस दौरान सत्ता में होने के चलते एलडीए के इंजीनियरों और अधिकारियों ने आंखें मूँद रखी थी। निजाम बदलने के बाद अपार्टमेंट को सील किया गया है। इसकी कीमत करीब 50 करोड़ के आस पास बताई जाती है। चार मंजिला अवैध इमारत को बिजली का कनेक्शन भी मिल गया। लेकिन सत्ता बदली तो उनके निर्माण को सील कर दिया गया था।
Published on:
17 Apr 2018 04:55 pm

बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
