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कठिन हालातों के आगे भी नहीं मानी हार, इन छात्रों ने CBSE Results में किया कमाल

कठिन हालातों के आगे घुटने टेकने के बजाए राजधानी के कई होनहारों ने उनका सामना कर CBSE Results में सफलता हासिल की।

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कठिन हालातों के आगे भी नहीं मानी हार, इन छात्रों ने CBSE Results में कर दिया कमाल

प्रशांत श्रीवास्तव, लखनऊ. कठिन हालातों के आगे घुटने टेकने के बजाए राजधानी के कई होनहारों ने उनका सामना कर सीबीएससी परिणामों में सफलता हासिल की। यूपी ने देश को कई टॉपर दिए। गाजियाबाद की रहने वाली मेघना श्रीवास्तव ने सीबीएसई 12वीं के एग्जाम में टॉप किया है। हालांकि राजधानी से इस बार कोई भी टॉप टेन में नहीं रहा लेकिन कई होनहारों ने कठिन परिस्थितयों के बावजूद अच्छे अंक प्राप्त किए। आइए जानते हैं इनकी सक्सेस स्टोरी-

पिता चलाते हैं स्टेशनरी शॉप, बेटी बनना चाहता है फैशन डिजाइनर

आरएलबी चिनहट की मेधावी छात्र ऋचा सिंह ने 95.9 प्रतिशत अंक लाकर अपने मां-बाप का नाम रोशन किया। ऋचा ने बताया कि, उसके पिता प्रभानंद सिंह की स्टेशनरी की दुकान है। उसकी दो बहनें और है। ऋचा के पिता प्रभानंद तिवारी का कहना है कि, वह तीनों बेटियों की पढ़ाई-लिखाई का खर्चा स्टेशनरी की दुकान से ही चलाते हैं।ऋचा रोज 4 से 5 घंटे की पढ़ाई की वह आगे चलकर फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हैं।

इलेक्ट्रीशियन पिता का बेटा बनना चाहता है वैज्ञानिक

इंदिरानगर के रहने वाले पुष्कर सोनी ने शारीरिक अक्षमता के बावजूद भी बोर्ड परीक्षा में कमाल कर दिया। उन्होंने 94.6% अंक प्राप्त किए। पुष्कर ने बताया कि बचपन से ही उनके गले की नस खिंची हुई है लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं समझा। इलेक्ट्रीशियन होने के बावजूद ने पिता ने उनकी पूरी मदद की। इसी का नतीजा है कि पुष्कर ने अच्छे अंक प्राप्त किए। पुष्कर का लक्ष्य वैज्ञानिक बनने का है। वह अभी बीटेक नहीं करना चाहते। वह बीएसएसी करना चाहते हैं। उनके मुताबिक बीटेक में जाकर छात्र नौकरी के पीछे भागने लगते हैं लेकिन वह अभी पढ़ना चाहते हैं।

सिलाई करके मां ने पढ़ाया, बच्ची ने नाम किया रोशन


अवध कॉलिजिएट की अविजीत कौर ने 12वीं में 90 प्रतिशत अंक पाकर अपनी मां की मेहनत को सफल कर दिया। उनके पिता गुरमीत सिंह 2012 से पहले तक वह ऑटो रिपेयर का काम करते थे, लेकिन आंखों से कमजोर होने के कारण दिखना बंद हो गया। घर की माली हालत इतनी खराब थी कि पढ़ाई मुश्किल थी। सारी जिम्मेदारी मां मीनू सलूजा के कंधों पर आ गई। उन्होंने दिन रात सिलाई करके बेटी को पढ़ाया। बेटी ने भी मां के सपने को पूरा किया। अविका ने बताया कि वह आगे सीए बनने का फैसला लिया है। इससे मां के सपने को पूरा करने के साथ ही घर को संभलने के लिए मदद कर सकूं।

साइनस इंफेक्शन को कर दिया माइनस

97 प्रतिशत अंक लाने वाले क्षितिज ने बारहवीं में काफी कठिन हालातों का सामना किया। यहां तक कि उन्हें साइनस इंफेक्शन भी नहीं रोक पाया। साइनस में सांस लेने में रुकावट, नाक की हड्डी का बढ़ना और तिरछा होना, एलर्जी होना इसकी आम समस्या है यानी किसी भी कारण से साइनस के संकरे प्रवेश मार्ग में अगर रुकावट आ जाती है। क्षितिज को भी इनका सामना करना पड़ा। एक वक्त तो ऐसा भी आया जब उन्हें लगा कि शायद वह परीक्षा न दे पाएं लेकिन उन्होंने एग्जाम दिए और सफलता भी हासिल की। वह सिविल सर्विसेज में जाना चाहते हैं।

डिप्रेशन का हुईं शिकार लेकिन एग्जाम में किया कमाल

आरएलबी की छात्रा आनंदी श्रीवास्तव एग्जाम से पहले डिप्रेशन का शिकार हो गईं। उन्हें मार्क्स की टेंशन सताने लगी थी लेकिन घर वालों ने उनका काफी ईलाज करवाया और काफी समझाया। इसके बाद आनंदी ने पढ़ाई पर फोकस किया और नतीजतन 94 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।