
Chaitra Navratri 2022: चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना,शुभ मुहूर्त और सरल पूजा विधि
लखनऊ ,(Chaitra Navratri 2022) नवरात्रि के प्रत्येक दिन माँ भगवती के स्वरुप शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता,कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सुबह से ही शुरू होता है। प्रतिदिन जल्दी स्नान करके माँ भगवती का ध्यान तथा पूजन करना चाहिए। सर्वप्रथम कलश स्थापना की जाती है। पंडित शक्ति मिश्रा ने बतायाकि
(Chaitra Navratri 2022) देवी पुराण के अनुसार मां भगवती की पूजा-अर्चना करते समय सर्वप्रथम कलश व घट की स्थापना की जाती है। घट स्थापना करना अर्थात नवरात्रि की कालावधि में ब्रह्मांड में कार्यरत शक्ति तत्त्व का घट में आवाहन कर उसे कार्यरत करना होता हैं। उन्होंने कहा कि कार्यरत शक्ति तत्त्व के कारण वास्तु में विद्यमान कष्टदायक तरंगें समूल नष्ट हो जाती है। कहा कि कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश के मुख में विष्णुजी का निवास, कंठ में रुद्र तथा मूल में ब्रह्मा स्थित हैं और कलश के मध्य में दैवीय मातृशक्तियां निवास करती हैं।
(Chaitra Navratri 2022)'कलश स्थापना चैत्र नवरात्रि शुभ मुहूर्त '
पंडित शक्ति मिश्रा ने बतायाकि 2 अप्रैल को चैत्र घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त हैं शनिवार की सुबह 6:22 बजे से 8:31 मिनट तक रहेगा। यानी कि कुल अवधि 2 घण्टे 9 मिनट की रहेगी। इसके अलावा घटस्थापना को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:08 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। वहीं प्रतिपदा तिथि 1 अप्रैल को सुबह 11:53 बजे से शुरू होगी और 2 अप्रैल को सुबह 11:58 पर खत्म होगी।
(Chaitra Navratri 2022) कलश स्थापना की विधि व् सामग्री
. जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र
. जौ बोने के लिए शुद्ध साफ़ की हुई मिटटी
. पात्र में बोने के लिए जौ
.कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल
. मौली (Sacred Thread)
. इत्र
. साबुत सुपारी
.दूर्वा
.कलश में रखने के लिए कुछ सिक्के
.पंचरत्न
.अशोक या आम के 5 पत्ते
.कलश ढकने के लिए ढक्कन
.ढक्कन में रखने के लिए बिना टूटे चावल
.पानी वाला नारियल
.नारियल पर लपेटने के लिए लाल कपडा
.फूल माला
पंडित शक्ति मिश्रा ने बतायाकि सबसे पहले जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र लें। इस पात्र में मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब एक परत जौ की बिछाएं। इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब फिर एक परत जौ की बिछाएं। जौ के बीच चारों तरफ बिछाएं ताकि जौ कलश के नीचे न दबे। इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब कलश के कंठ पर मौली बाँध दें। कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक लिखें। अब कलश में शुद्ध जल, गंगाजल कंठ तक भर दें। कलश में साबुत सुपारी, दूर्वा, फूल डालें। कलश में थोडा सा इत्र डाल दें। कलश में पंचरत्न डालें। कलश में कुछ सिक्के रख दें। कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते रख दें। अब कलश का मुख ढक्कन से बंद कर दें। ढक्कन में चावल भर दें। कहाकि नारियल पर लाल कपडा लपेट कर मौली लपेट दें। अब नारियल को कलश पर रखें।
नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में वृद्धि होती है। नारियल का मुख ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं, जबकि पूर्व की तरफ नारियल का मुख रखने से धन का विनाश होता है। इसलिए नारियल की स्थापना सदैव इस प्रकार करनी चाहिए कि उसका मुख साधक की तरफ रहे। ध्यान रहे कि नारियल का मुख उस सिरे पर होता है। जिस तरफ से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है।
Published on:
20 Mar 2022 07:29 pm

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