
चंद्रकांत सोमपुरा राममंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। उनके ही परिवार के अन्नू भाई सोमपुरा इन दिनों पूरी तन्मयता से अयोध्या के राममंदिर निर्माण में लगे हैं।
Ayodhya Ram Mandir: जब आप गुजरात के प्रभास पाटन में श्री सोमनाथ मंदिर का दर्शन करने जाते हैं तो चौराहे पर ही पत्थर का एक शिलापट्ट दिखता है। जिस पर लिखा है कि सोमनाथ ही सखावत में आक्रांता मोहम्मद गजनी के आक्रमणों का सामना सोमपुरा ब्राम्हणों ने किया और अनगिनत बलिदान दिया। उन्हीं सोमपुरा ब्राम्हणों में से एक प्रभाशंकर सोमपुरा ने सोमनाथ मंदिर का पूरा शिल्प तैयार किया था। उनके नाती चंद्रकांत सोमपुरा राममंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। उनके ही परिवार के अन्नू भाई सोमपुरा इन दिनों पूरी तन्मयता से अयोध्या के राममंदिर निर्माण में लगे हैं।
33 साल पहले उन्होंने मंदिर के पत्थरों को तरासने का काम शुरू
अन्नू भाई सोमपुरा गुजरात के प्रभास पट्टन के ही निवासी हैं लेकिन पिछले तीन दशकों से अधिक समय से अयोध्या में कारसेवक पुरम में राममंदिर को आकार दे रहे हैं। करीब 33 साल पहले ही जब अयोध्या में लाठी, गोली चल रही थी और जन्म भूमि तक पहुंचना दूर की कौड़ी थी।
तब चंद्रकांत भाई सोमपुरा के कहने पर अन्नू भाई अयोध्या आ गए। करीब 33 साल पहले उन्होंने मंदिर के पत्थरों को तरासने का काम शुरू कर दिया था। एक तरफ उग्र आंदोलन दूसरी तरफ मामला न्यायालय में था और मंदिर निर्माण संबंधी कोई भी गतिविधि गैरकानूनी थी। ऐसे कठिन दौर में महंत आचार्य परमहंस दास जी ने जन्मभूृमि स्थल से करीब डेढ़ से दो किलोमीटर दूर जमीन मुहैया कराया और मंदिर के पत्थरों को तरासने का काम अन्नूभाई सोमपुरा ने शुरू कर दिया।
अन्नूभाई की उम्र करीब 76 वर्ष हो चुकी है
साल 1990 जब प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार थी। कारसेवकों के रक्त से अयोध्या लाल हुई थी। उसी साल रामघाट चौराह के पास लाल बलुआ पत्थरों से मंदिर की शिलाओं को गढऩे का काम शुुरू कर दिया गया था। दुनिया भर में चर्चित राममंदिर निर्माण का कार्य 33 साल पहले 1990 में ही शुरू कर दिया गया था। वह भी उस समय उपलब्ध महज दो पत्थरों से छेनी हथौड़ी चलाकर निर्माण का शुभारंभ हुआ था।
हांलाकि 15 दिन बाद राजस्थान के भरतपुर से ट्रकों पर लाल पत्थरों का आना शुरू हो गया था। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचे के विध्वंस के बाद अन्नू भाई सोमपुरा ने काम को और तेज कर दिया। उन्होंने गुजरात से अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी अयोध्या बुला लिया और पत्थरों की गढ़ाई तेज कर दी गई। अब अन्नूभाई की उम्र करीब 76 वर्ष हो चुकी है लेकिन वह पूरी तन्मयता से भव्य राममंदिर निर्माण को आकार दे रहे हैं।
Published on:
17 Nov 2023 11:23 am
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