इतना मिला है बजट
इस प्रोजेक्ट के लिए डीएसटी के ड्रग एंड फार्मास्युटिकल रिसर्च प्रोग्राम के तहत 100 लाख रुपये एवं इंडस्ट्री पार्टनर के तौर पर डीआरएल से 45 लाख रुपए प्राप्त हुए हैं। कुल मिलाकर यह यह राशि 1 करोड़ 45 लाख है जिसमें से निधि सामान रूप से सीडीआरआई एवं डीआरआईएलएस को दी जाएगी।
अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए डीएसटी से डॉ शोभना भास्करन, डीआरआईएलएस के निदेशक डॉ ए वेंकटेश्वर, डीआरएल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (वित्त) एमवी नरसिम्हम, सीएसआईआर-सीडीआरआई से नसीम अहमद सिद्दीकी के साथ डीआरआईएलएस के डॉ उदय सक्सेना (प्रोफेसर, ट्रांसलेशनल रिसर्च), प्रो परिमल मिश्रा (डीन, अकेदेमिक अफेयर्स-बायोलॉजी) तथा प्रोफ़ मनोजीत पाल (डीन, अकेदेमिक अफेयर्स-केमिस्ट्री) भी मौजूद थे।
मोटापे के लिए दवा क्यों?
यह प्रोजेक्ट स्थूलता (मोटापा) रोधी औषधियों के अनुसंधान एवं विकास पर केन्द्रित है जिसकी वजह है कि आज मोटापा एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। सम्पूर्ण विश्व में 2.1 बिलयन लोगो का वजन उनके आदर्श भार से अधिक हैं। इस से उत्पन्न बीमारियों का प्रतिशत भारत में बहुत ज्यादा है लगभग 30त्न जनसंख्या स्थूलकाय की श्रेणी में आती है। यह एक महंगी बीमारी है, अमेरिका में सालाना 190 बिलियन डालर का मेडिकल खर्च इस पर आता है। वर्ष 2012-2022 के दशक में स्थूलता-रोधी औषधियों के वैश्विक बाजार में लगभग 30त्न की तीव्र वृद्धि का आंकलन किया गया है।