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होली कब है…होली कब है…होली कब है?…कल है होली रे बाबा!

होलिका दहन की तीन शर्तें होती हैं जिन को पूरा होने पर ही होलिका में आग लगा के होलिका दहन किया जा सकता है। सूर्योदय के बाद होलिका दहन नहीं होता है और इस बार शाम को पूर्णिमा समाप्त हो जाएगी जिसके चलते 23 की रात को होलिका को नहीं जलाया जा सकता।

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Prashant Mishra

Mar 22, 2016

लखनऊ.
इस बार तिथियों का समीकरण ऐसा है कि लोगों को ये समझने में दिक्कत हो रही है कि किस दिन होलिका दहन है और किस दिन रंगोत्सव मनाना है। यदि आप भी होली के समय व दिन को लेकर कन्फ्यूज हैं तो हम आप की जानकारी के लिए बता दें कि तिथियों व नक्षत्रों के हिसाब से होली का त्यौहार 23 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन ही होली का अवकाश भी घोषित कर दिया गया है। जिससे होली को लेकर होने वाली कन्फ्यूजन दूर हो गई है। जिसके चलते 23 को ही लखनऊ प्रशासन ने भी बंदी का आदेश जारी कर दिया है। ऐसे में 23 मार्च को लखनऊ व आस-पास क्षेत्र 23 मार्च की सुबह में 3:19 बजे से सूर्योदय के पहले होलिका दहन किया जाएगा व 23 की सुबह से होली रंगोत्सव मनाया जाएगा।

होलिका दहन की होती है तीन शर्तें

होलिका दहन करने के लिए तीन प्रमुख शर्ते होती हैं। पहला होलिका दहन के समय पूर्णिमा की तिथि हो, दूसरा रात का समय और तीसरा भद्रा बीत चुकी हो। यह तीनों ही संयोग बुधवार की सुबह में मिल रहा है। जिससे 23 की सुबह का समय होलिका दहन व 23 का दिन रंगोत्सव मनाने के लिए शुभ है।

ये है कन्फ्यूजन का कारण

होलिका दहन की तीन शर्तें होती हैं जिन को पूरा होने पर ही होलिका में आग लगा के होलिका दहन किया जा सकता है। सूर्योदय के बाद होलिका दहन नहीं होता है और इस बार शाम को पूर्णिमा समाप्त हो जाएगी। जिसके चलते 23 की रात को होलिका को नहीं जलाया जा सकता। जिसके चलते होलिका में आग 23 की सुबह 3.19 मिनट के बाद सुबह होने से पहले लगाना शुभ होगा।

ये हैं मान्यताएं

होलिका की आग से नए अनाज की बालियों को भूना जाता है और गन्ने के संग परिक्रमा कर परिवार के लोग उसे चूसते हैं। उसके बाद रंगोत्सव मनाया जाता है। होली दहन के साथ ही होली खेलने का प्रावधान है। होली की भस्म लगाने और घरों में होलिका की आग ले जाने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन कामना की जाती है कि परिवार में संपन्नता बनी रहे।

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