
Toilet - ek Prem katha movie
ललितपुर।स्वच्छ भारत अभियान को पटल पर उतारने के लिए तरह-तरह की योजनाएं बनाई जा रही है और अधिकारी द्वारा उनका सही तरीके से क्रियान्वयन कराने के लिए तरह-तरह से ग्राम प्रधानों एवं ग्रामीणों को शिक्षा दी जा रही है। इसी श्रृंखला के अंतर्गत जिले में स्वच्छ भारत अभियान को और गति प्रदान करने के लिए शुक्रवार को जनपद के सभी ग्राम प्रधानों के साथ जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार, जिला पंचायत राज अधिकारी ब्रह्मचारी दुबे, जिला सूचना अधिकारी पीयूष चन्द्र राय तथा अन्य जनपद स्तरीय अधिकारियों तथा सहायक विकास अधिकारियों (पंचायती राज) के साथ परिवार सिनेफ्लैक्स सिनेमा घर में टॉयलेट-एक प्रेम कथा फिल्म देखी।
महिला प्रधान भी रहीं साथ
इस शो में महिला ग्राम प्रधान भी बड़ी संख्या में उपस्थित थीं। इस फिल्म में एक छोटे से कस्बे की कहानी दिखायी गयी है, जहां घर में टॉयलेट को धार्मिक रीति-रिवाजों के विरूद्ध माना जाता है। इस फिल्म में एक पढ़ी लिखी लड़की जया का विवाह एक ऐसे घर में हो जाता है जिसमें शौचालय नहीं है। जया का पति केशव अपनी पत्नी के मान सम्मान की रक्षा के लिए पूरे समाज से लोहा लेता है और अन्तत: समाज को उसके आगे झुकना पड़ता है और घर में शौचालय बनाने की अनुमति मिल जाती है।
फि़ल्म में दिखया गया है
इस फिल्म में यह दिखाया गया है कि स्वच्छ भारत मिशन की सफलता के लिए महिलाओं की सहभागिता कितनी आवश्यक है। फिल्म में दिखाया गया है कि अक्सर लोग शौचालय तो बनवा लेते हैं लेकिन उसका उपयोग नहीं करते बल्कि उसमें स्टोर, टेलरिंग शॉप के रूप में उपयोग करते हैं। फिल्म देखने के दौरान उपस्थित समस्त ग्राम प्रधानों द्वारा कई बार स्वच्छ भारत मिशन समर्थक डॉयलॉगों पर तालियां पीटी गईं, जिससे यह महसूस हुआ के ललितपुर में बदलाव आ रहा है।
इनका कहना है
मुख्य विकास अधिकारी ने फिल्म देखने के दौरान चर्चा करते हुए कहा कि हमें सोच बदलने की जरूरत है और यह फिल्म स्वच्छ भारत मिशन में तेजी लाने में अत्यन्त सहायक होगी। जिलाधिकारी ने इस अवसर पर लोगों की बदलती सोच पर संतुष्टि जाहिर की और कहा कि अब यह महसूस होता है कि जल्द ही हम इस जिले को खुले में शौच से मुक्त करा लेेंगे। इस अवसर पर उपस्थित सभी दर्शकों को पंचायती राज विभाग की तरफ से स्वलपाहार भी वितरित किया गया।
क्या कहते हैं ग्राम प्रधान
फिल्म देखने के बाद ग्राम प्रधानों का कहना है कि यह फिल्म वास्तव में स्वच्छता पर आधारित है। हमें भी इसी तर्ज पर अपने गांव में रहने वाले ग्रामीणों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाना होगा। उन्हें सिखाना होगा की स्वच्छता अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है। जब स्वच्छता रहेगी तो स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और मानसिक संतुलन भी अच्छा रहेगा।
Published on:
25 Aug 2017 08:57 pm
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