
doctors neglecting patients
क्या है मामला
बताते चले कल रात लखनऊ राजकीय
रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल में जब पत्रकार अपनी माँ को एडमिट कराने पहुचे तो डॉक्टर
ने इमरजेंसी में ले जाने को बोला और जब पत्रकार द्वारा डॉक्टर से पर्चा या फाइल की
बात कही तो वहाँ मौजूद इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टर एस.के. सिंह ने कहा कि क्या तुमने
मुझे कुछ अभी दिया जो मैं तुम्हारी फाइल दूँ| इतना सुनने के बाद पत्रकार इमरजेंसी
से बाहर आ गया और देखा कि अस्पताल में वार्ड बॉय होने के बावजूद तीमारदार खुद स्ट्रेचर
खींच रहे है जिसकी फोटोग्राफी करने पर डॉक्टर साहब भड़क गये।
पत्रकार द्वारा परिचय देने
के बाद भी डॉक्टर एस.के. सिंह ने कहा बहुत आते है मेरी गर्मी देखोगे, जिसपर बहस
शुरू हो गयी और पत्रकार ने लखनऊ सीएमओ को फ़ोन पर इसकी जानकारी दी और साथ ही साथ
अस्पताल प्रशासन के सीएमएम को भी जानकारी दी|
अस्पताल प्रशासन सवालों के
घेरे में
अब देखना यह है कि रानी
लक्ष्मी बाई अस्पताल में क्या इसी तरह डॉक्टरों की मनमानी बनी रहेगी| जबकि अस्पताल
में वार्ड बॉय होने के बावजूद तीमारदार स्ट्रेचर खींचते है इसके लिए कौन जिम्मेदार
है अस्पताल प्रशासन या मनमाना रवैया?
हाल ही में संविदाकर्मियों
को निकालने का मामला सामने आया था जिसमे कहा गया कि अब टेंडर किसी और ने ले लिया
है तो अब नौकरी नही मिलेगी जिससे आक्रोशित संविदाकर्मियों ने जमकर हॉस्पिटल में
हंगामा काटा था और मामले को जैसे तैसे शांत कराया गया| नयी आने वाली कंपनी के
डायरेक्टर ने आश्वासन दिया था कि संविदाकर्मी जस के तस काम करेगे और उनका नियुक्ति
पत्र 4-5 दिन में देने की बात कही थी परन्तु अभी तक इस विषय में कोई कार्रवाई नही
हुयी| जिससे संविदाकर्मी काफी परेशान है क्योंकि उनकी रोजी रोटी जाने का डर सता
रहा है|
मौके पर पहुचे सीएमएस
सूचना मिलते ही आनन्-फानन सीएमएस
मौके पर पहुचे और तब तक एस.के सिंह ड्यूटी से जा चुके थे साथ ही सभी को फटकार लगाई
और मरीज को एडमिट कर उपचार शुरू कर दिया। पर डॉक्टर द्वारा
बत्तमीजी से बात करने पर अभी कोई कार्रवाई नही हुई और अस्पताल प्रशासन डॉक्टर को
बचाने में लगा है।
Published on:
16 Jun 2016 01:41 pm
