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अनिल के. अंकुर
लखनऊ। देश की सियासत में राजनीति का महोत्सव के रूप में आम चुनाव हर पांच साल में मनाया जाता है। इस बार भी महोत्सव की शुरूआत हो चुकी है। आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है। दावे और वादे किए जा रहे हैं। पर इतिहास गवाह है कि इस महोत्सव में तरह तरह के नारे और जुमले भी निकलते रहे हैं जो लम्बे समय तक लोगों को याद रहते हैं।
किन्नरों का जुलूस
पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा ने कांग्रेस छोड़ी और वे अलग होकर लखनऊ लोकसभा सीट से चुनाव लड़े। उनके खिलाफ निवर्तमान तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी कांग्रेस की ओर से चुनाव मैदान में थे। चुनाव प्रचार गति पकड़ रहा था, लेकिन एक दिन पूरे प्रदेश में बहुगुणा का चुनाव प्रचार छा गया। उन्होंने किन्नरों का जुलूस निकलवाया। जो नारे लगा रहे थे - हम नर हैं न नारी- हम हैं नारायण दत्त तिवारी। यह नारा लम्बे समय तक चर्चा में रहा।
हाय-हाय न किच-किच
इसी प्रकार कानपुर में केडीए की अफसरी की नौकरी छोड़कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडऩे वाले भगवती प्रसाद दीक्षित भी हमेशा चर्चा में रहे। काले और सफेद घोड़े पर सवार होकर रॉबिन हुड की ड्रेस में वे घूमते और एकला चलो रे का सफेद झंडा लहराते हुए जगह - जगह रुकते। उनके समर्थक यह नारा लगाते थे- हाय-हाय न किच-किच, भगवती प्रसाद दीक्षित।
गरीबी हटाओ देश बचाओ
वर्ष 1951-52 में जब चुनाव हुआ, जिसमें पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में सरकार बनी। करीब दो दशक बाद 1971 में लोकसभा चुनाव के पहले उस समय सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस में जबरदस्त विवाद हो गया। नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस में विभाजन हो गया। उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी ने नारा दिया 'गरीबी हटाओ देश बचाओ।' इस नारे का असर यह हुआ कि प्रचंड बहुमत के साथ इंदिरा गांधी के नेतृत्व में सरकार बनी। फिर इमजेंसी के बाद विपक्षी दल जनता पार्टी ने नारा दिया- खा गई शक्कर पी गई तेल, ये देखो इंदिरा का खेल। 1977 में विपक्षी नेताओं ने इंदिरा के नारे 'गरीबी हटाओ देश बचाओ' के उलट नारा दिया 'इंदिरा हटाओ देश बचाओ। और इसका असर यह रहा कि इंदिरा गांधी चुनाव हार गईं।
जब तक सूरज चांद रहेगा- इंन्दिरा तेरा नाम रहेगा
वर्ष 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने नारा दिया 'जब तक सूरज चांद रहेगा इंदिरा तेरा नाम रहेगा।' इस नारे के दम पर राजीव गांधी के नेतृत्व में देश में कांग्रेस की सरकार बनी। वर्ष 1984 में लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद संसदीय सीट से सुपरस्टार अभिनेता अमिताभ बच्चन और हेमवती नंदन बहुगुणा के बीच मुकाबला हुआ। बहुगुणा ने नारा दिया 'नाम बहुगुणा काम सौ गुणा', इसके जवाब में अमिताभ समर्थकों ने भी नारा दिया। रसगुल्ला में छेदै-छेद , बहुगुणा भागे खेतै-खेत।
सब पर भारी- अलट बिहारी
वर्ष 1996 में भारतीय जनता पार्टी ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव पडऩे का निर्णय लिया। उस दौरान पार्टी की ओर से नारा दिया गया- उज्ज्वल भविष्य की है तैयारी-बच्चा-बच्चा अटल बिहारी, सब पर भारी-अटल बिहारी। इस प्रकार समय समय पर यूपी में नारों ने राजनीति की दशा और दिशा बदली है। इस बार भी सियासी दल नारे गढऩे में जुटे हैं।
Published on:
10 Apr 2019 04:24 pm

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