#WorldPopulationDay: ये है यूपी का हाल, 60 महिलाओं पर एक पुरुष नसबंदी

जागरुकता कार्यक्रम व योजनाओं के संचालन के बाद भी प्रदेश में आबादी को कंट्रोल नहीं किया जा सका है।

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Jul 10, 2016
World population day
लखनऊ।
तेजी से बढ़ रही जनसंख्या हमारे समाज के लिए खतरनाक है। दुनिया में आबादी की दृष्टि से भारत दूसरे नंबर पर है।ऐसे में इसकी रोकथाम बहुत आवश्यक है। वहीं भारत के अधिकतम आबादी वाले राज्य में शुमार उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी भी बेहद अहम है।

शिक्षा
के विकास के साथ समाज में जागरूकता तो आ रही है लेकिन अभी भी नसबंदी के
मामले में पुरुष बेहद पीछे हैं। इसका कारण है अभी भी पुरुषों के अंदर ऐसी
मानसिकता है, जिसमें वह नसबंदी को अपनी शान के खिलाफ मानते हैं। शायद यही
वजह है कि
तमाम तरह के जागरुकता कार्यक्रम व योजनाओं के संचालन के बाद भी प्रदेश में
आबादी को कंट्रोल नहीं किया जा सका है।

उत्तर प्रदेश में 60 महिलाओं पर एक पुरुष नसबंदी का आंकड़ा यही बताता है कि अभी भी सोच में बड़े बदलाव की आवश्यकता है। जिस गति से प्रदेश में आबादी बढ़ रही
है अनुमान है कि वर्ष 2051 में यूपी की जनसंख्या 31 करोड़ हो जाएगी।

ये हैं एनएचएम के आंकड़ें
हालाकि ये आंकड़ें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और सिफ्सा की ओर से जारी
किये गए थे लेकिन इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि स्थिति इससे और गम्भीर हो सकती है।
ये तब है जब पुरुषों की नसबंदी बेहद सरल व आसान है। बावजूद
इसके दकियानूसी सोच के चलते पुरुष ऐसा नहीं करवाते। ऐसे में विश्व
जनसंख्या दिवस के अवसर समाज में परिवार नियोजन के प्रति जागरुकता बढ़ाना
बेहद आवश्यक हो गया है। खासकर पुरुषों को समझना होगा कि उनकी समाज के प्रति
बड़ी जिम्मेदारी है।

गर्भनिरोधक के बारे में जागरूकता की है कमी
दो बच्चों के जन्म में कम
अंतराल मां और शिशु स्वास्थ्य के लिए खतरा है। बावजूद इसके समाज में इसके
प्रति लापरवाही दिखायी देती है। स्थिति यह कि देश में कुल महिला आबादी की 50 प्रतिशत महिलाएं दो बच्चों के जन्म के मध्य तीन साल के अंतराल को उचित
मानती हैं लेकिन 59. 3 प्रतिशत शिशु जन्म में दो बच्चों के मध्य से कम का
अंतर पाया गया है। लिहाजा दो बच्चों के जन्म के मध्य तीन साल का अंतर रखने
के लिए गर्भ निरोधक साधनों के उपयोग से संंबंधी जागरुकता भी समाज में लाने
के प्रयास होने चाहिए। विडंबना देखिये, प्रदेश में पांच में से एक विवाहित
महिला अभी गर्भधारण करना नहीं चाहते लेकिन गर्भ निरोधक का उपयोग नहीं कर
रहे है।

यह है जरूरी
दम्पतियों को गर्भ निरोधक साधनों की सही व पूरी जानकारी जरूरी है।
उन्हें गलत अवधारणाओं से दूर होने के लिए परामर्श लेना चाहिए।
दम्पतियों के लिए गर्भ निरोधक संसाधनों की उपलब्धता भी आवश्यक है।

विवाह को लेकर यह है सच्चाई
खासकर
महिलाओं के खुशहाल जीवन के लिए सही उम्र में विवाह बेहद जरूरी है। इससे वह
स्वस्थ रहती है। क्योंकि कम उम्र में शादी होने से गर्भधारण की संभावनाएं
बढ़ जाती हैं जबकि किशोरवास्था में गर्भधारण उनके लिए खतरनाक होता है।
गर्भधारण एवं प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताएं विश्व में १५-१९ वर्ष की
आयु की महिलाओं में मृत्यु का प्रमुख कारण हैं।

उत्तर प्रदेश के आंकड़ें
- प्रदेश में हर चार में से एक महिला का विवाह 18 साल से पहले हो जाता है।
- यहां 43.7 प्रतिशत किशोरी महिलाएं गर्भवती या माताएं बनती हैं।
- 15 -19 आयु की 60 प्रतिशत महिलाएं यह मानती हैं कि उनके स्वास्थ्य संबंधी निर्णय उनके हाथ में नहीं हैं।

क्या करें
-लड़कियों के साथ भेदभाव करने वाले समाज में लैंगिक धारणाओं में परिवर्तन लाना चाहिए।
-लड़कियों के लिए शिक्षा और आजीविका के अवसरों मेंं वृद्घि लाने की आवश्यकता है।
- बाल विवाह कानून को लागू किया जाना चाहिए।

परिवार नियोजन और स्वास्थ्य
- शिशु
जिनके जन्म में कम समय का अंतराल हो अथवा ऐसी माता जिनकी आयु 18 से कम या 35 वर्ष से अधिक हो, उन शिशुओं के समय से पहले जन्म लेेने, गर्भस्थ
शिशु-मृत्यु अथवा कम वजन होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है।
- कम व
मध्य आय वाले देशों में 20 वर्ष से कम आयु की माताओं के शिशु में मृत्यु की
संभावनाएं उसी देश की 20 से 29 वर्ष की आयु की माताओं के शिशुओं से 50 प्रतिशत अधिक होती है।
- बच्चों के जन्म में तीन साल के अंतर पर होने वाले शिशुओं में पांच वर्ष आयु से पहले मृत्यु में एक चौथाई की कमी आती है।

- गर्भ निरोध के कई विकल्प उपलब्ध होने पर भी 21. 4 प्रतिशत लोग पारंपरिक तरीके व 18. 4 प्रतिशत महिला नसबंदी प्रचलित है।
- परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी बेहद कम है जो परिवार नियोजन की सफलता के लिए भारी चुनौती है।
- प्रदेश
में 20. 7 प्रतिशत दम्पति गर्भधारण करना नहीं चाहते लेकिन गर्भ निरोधक साधन
का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे दम्पतियों की संख्या हमारे यहां अन्य
राज्यों की अपेक्षा अधिक है।

परिवार नियोजन के लिए सरकार की योजनाएं व कार्यक्रम
परिवार
नियोजन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से योजनाएं व कार्यक्रम संचालित
किये जा रहे हैं। इसमें नसबंदी पर मुआवजे की योजना, आशा कार्यकत्री द्वारा
घर-घर भ्रमण कर गर्भ निरोधक साधनों का वितरण, आशा कार्यकत्री द्वारा दो
बच्चों के जन्म में अंतराल रखने को सुनिश्चित करना, प्रेरक व सेवा
प्रदाताओं को प्रसव के बाद कापर टी के लिए प्रोत्साहन राशि, परिवार नियोजन
क्षतिपूर्ति योजना, बिना चीरा-बिना टांका पुरुष नसबंदी दिवस, कापर टी
लगवाने के लिए निश्चित दिन, निश्चय किट व हौसला साझेदारी आदि शामिल हैं।



Published on:
10 Jul 2016 08:46 pm
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