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पूर्व मंत्री का बड़ा बयान- आबादी के हिसाब से विश्वकर्मा समाज को मिले हिस्सेदारी

मुंबई के वलाड में 'एक शाम कारपेन्टर के नाम' कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सपा सरकार में मंत्री रहे रामआसरे विश्वकर्मा ने की शिरकत

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

Nov 24, 2019

Ex UP Minister ram Asrey Vishwakarma

आबादी के हिसाब से लोकसभा, राज्यसभा विधानसभा और सरकार में पूरी हिस्सेदारी की मांग करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही सभी सुविधाओं में विश्वकर्मा समाज की पूरी हिस्सेदारी तय किया जाये

लखनऊ. मुंबई के वलाड में 'एक शाम कारपेन्टर के नाम' कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सपा सरकार में मंत्री रहे रामआसरे विश्वकर्मा ने समाज के लोगों से एकजुट रहने की अपील की। आबादी के हिसाब से लोकसभा, राज्यसभा विधानसभा और सरकार में पूरी हिस्सेदारी की मांग करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही सभी सुविधाओं में विश्वकर्मा समाज की पूरी हिस्सेदारी तय किया जाये। हमारे लोहे और लकड़ी के कारोबार और रोजगार के लिये कानून बनाया जाये तथा विकास के लिये नीति बनायी जाये। आरक्षण के तहत विश्वकर्मा समाज के युवकों को नौकरी दी जाये। विश्वकर्मा रविवार को पश्चिम मुम्बई के एसवी रोड मलाड के बजाज हाल में आयोजित कारपेन्टर सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर इस वर्ष विश्वकर्मा रत्न का पुरस्कार प्रसिद्ध समाजसेवी राम सूरत विश्वकर्मा को दिया गया। विश्वकर्मा ने राम सूरत विश्वकर्मा को बधाई देते हुए कहा कि जिस सेवा के लिये आपको यह पुरस्कार दिया गया है, वह समाजसेवा आजीवन जारी रखनी चाहिये। कहा कि सम्मान के साथ-साथ अधिकार मिलने से व्यक्ति का स्वाभिमान बढ़ता है और व्यक्ति हीनता की भावना त्यागकर समाज के उन्नति के शिखर पर पहुंचता है।

सपा को विश्वकर्मा समाज की हितैषी पार्टी बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की सपा सरकार ने विश्वकर्मा पूजा को सरकारी छुट्टी घोषित कराकर विश्वकर्मा समाज का सम्मान बढ़ाया था, लेकिन भाजपा की सरकार बनते ही उसे निरस्त कर दिया गया। यह विश्वकर्मा समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की सरकार में विश्वकर्मा समाज के इण्टर पास छात्रों को आईटीआई का प्रमाण पत्र और वर्कशाप के लिये ग्रामसभा जमीन का पट्टा देने का आदेश जारी करके विश्वकर्मा समाज को मजबूत किया था। भाजपा राज में विश्वकर्मा समाज पर लगातार उत्पीड़न और अत्याचार हो रहा है। न तो सरकार सुनवाई कर रही है और न पुलिस कार्यवाही कर रही है। पूर्व मंत्री ने कहा कि सपा सरकार में रामआसरे विश्वकर्मा को उच्चशिक्षा राज्यमन्त्री बनाया गया। अगर उत्तर प्रदेश में विश्वकर्मा समाज के व्यक्ति को विधायक और मन्त्री बनाया सकता है तो दूसरे राज्यों में क्यों नहीं?

कहा, अब समाज के लोगों को एकजुट होने की जरूरत
विश्वकर्मा ने कहा कि हम अनेक संस्थाओं और पार्टियों में बंटे और बिखरे होने के कारण एकजुट नहीं हो सके। यही हमारे पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण है। अब सभी को एकजुट होने की जरूरत है, ताकि विश्वकर्मा समाज के सम्मान और स्वाभिमान और हिस्सेदारी की लड़ाई लड़ी जा सके। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा समाज का इतिहास सही रूप से देश के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके कारण आज हम निर्माणकर्ता से मालिक न बनकर केवल मजदूर बनके रह गये। हमारी वास्तविक पहचान आज तक नहीं बन पायी। यही कारण है कि विश्वकर्मा समाज की पूरे देश में उपेक्षा हो रही है। हमें भगवान विश्वकर्मा और उनके वंशजों के इतिहास को जन-जन तक पहुंचाना होगा। कहा कि भगवान विश्वकर्मा ही हमारे आराध्य देव हैं और इन्हीं से हमारी पहचान हैं।

विश्वकर्मा समाज का योगदान
भगवान विश्वकर्मा ने आदिकाल से ही सभी देवताओं की आवश्यकता को पूर्ण किया। अगर भगवान शिव को सोने का महल भगवान कृष्ण को द्वारिकापुरी भगवान इन्द्र को इन्द्रपुरी तथा यम को यमपुरी दिया तो भगवान राम के लिये पुष्पक विमान का निर्माण करके अपनी महत्ता को उस समय भी बनाये रखा था। देश और दुनिया के विकास और तकनीकी एवं इंजीनियरिंग के निर्माण में विश्वकर्मा वंशजों ने समय समय पर बडा योगदान दिया है। सूचना क्रान्ति के जनक सैम पित्रोदा तथा सरदार पटेल के मूर्ति के प्रारूपकार तथा वास्तुकार वी रामसुतार तथा साइकिल के आविष्कारक अस्ट्रेलिया के मैकमिलन तथा होंडाकार के आविष्कारक जापान के साइचिरो होंडा सभी विश्वकर्मा समाज के ही थे। देश का विकास और निर्माण विश्वकर्मा समाज से ही प्राम्भ हुआ। अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन और भारत के राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह विश्वकर्मा वंश में पैदा होकर विश्वकर्मा समाज का नाम आगे बढ़ाया। मगर हम आज राजनैतिक भागीदारी नहीं ले पाये और न विधायक सांसद व मन्त्री बना पाये, जिसके कारण हम विकास की दौड में पीछे रह गये। हम मालिक से मजदूर बनकर रह गये।

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