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BJP को उसकी ही ‘पिच’ पर सपा देगी चुनौती! अखिलेश यादव बोले-आहत संत अर्थात सत्ता का अंत

UP Politics: BJP को उसकी ही 'पिच' पर समाजवादी पार्टी चुनौती दे सकती है। अखिलेश यादव का कहना है कि आहत संत अर्थात सत्ता का अंत।

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लखनऊ

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Harshul Mehra

Jan 29, 2026

up assembly elections 2027 samajwadi party may give tough challenge to bjp know akhilesh yadav statement

BJP को उसकी ही 'पिच' पर सपा देगी चुनौती! फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज

UP Politics: पिछले दिनों समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भुवनेश्वर में दिए एक बयान में कहा था कि BJP को उसके ही तरीके से हराया जा सकता है। यूपी में सनातन के सम्मान के मुद्दे पर मचे राजनीतिक घमासान से साफ है कि समाजवादी पार्टी अब BJP को उसकी ही 'पिच' पर चुनौती देगी। महाकुंभ के आयोजन के बाद से ही समाजवादी पार्टी लगातार इस मुद्दे पर BJP को कमजोर करने का आधार तैयार करने में जुटी है। हाल ही में ब्राह्मणों की उपेक्षा का मुद्दा उठाकर इस वर्ग को साधने की कोशिश पार्टी ने की।

Uttar Pradesh Politics: BJP को उसके सबसे मजबूत मुद्दे पर कमजोर करेगी सपा!

इसके बाद वाराणसी के मणिकर्णिका घाट मामले और प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले ने समाजवादी पार्टी की रणनीति को गति दी। साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए समाजवादी पार्टी अपनी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (PDA) की गोलबंदी के साथ ब्राह्मणों सहित अन्य वर्गों तक समर्थन के विस्तार की रणनीति पर आगे बढ़ेगी। पार्टी की कोशिश है कि सनातन के सम्मान के सवाल के सहारे BJP को उसके सबसे मजबूत मुद्दे, हिंदुत्व पर ही कमजोर किया जा सके।

UP News: बिछाई जा रही सनातन के सम्मान के मुद्दे पर सियासी बिसात

BJP को हिंदुत्व का मुद्दा हमेशा चुनावी लाभ पहुंचाता रहा है। विरोधी दल BJP की इस मजबूत 'पिच' पर आने से कतराते हैं। जब भी उन्होंने इस मुद्दे को छूने की कोशिश की, तब-तब विरोधी दलों को नुकसान होता रहा है। ऐसे में समाजवादी पार्टी अपनी रणनीति पर बहुत संभलकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। अखिलेश यादव यह दोहराते रहे हैं कि जब वह एक मंदिर में गए तो मंदिर को गंगाजल से धोया गया। इसी उदाहरण के साथ अखिलेश यादव ने संगम में स्नान किया था। इसके बाद महाकुंभ भगदड़ मामले पर लंबे समय तक अखिलेश हमलावर रहे। समाजवादी पार्टी केवल उन मुद्दों को चुनकर मुखर हो रही है, जिनसे लोगों की भावनाएं या हित, सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। मथुरा में बांके बिहारी कॉरिडोर हो या वाराणसी में विकास, इन सब मुद्दों पर मुखरता उनकी इसी रणनीति का हिस्सा है।

Uttar Pradesh Politics: BJP के हिंदुत्व की धार कम करने की रणनीति

अखिलेश यादव लगातार अपनी गतिविधियों से खुद के सनातन के प्रति आस्थावान होने का उदाहरण भी देते रहे हैं। अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुद्दे पर BJP को सनातन विरोधी करार देने की कोशिश की जा रही है। पार्टी सूत्रों की माने तो सनातन को लेकर ब्राह्मणों के सम्मान तक का मामला एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में BJP से एक बड़े वर्ग की नाराजगी है, जो समाजवादी पार्टी के साथ आ सकता है। इस समाज में पैठ बनाने के लिए अलग-अलग स्तर पर संवाद भी चल रहा है। समाजवादी पार्टी की यह रणनीति BJP के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है।

Lucknow News: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले से और मुखर होने का मिला अवसर

अगर धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर विपक्ष भी पूरे आत्मविश्वास से सवाल उठाने लगे तो BJP के कोर एजेंडे को नुकसान होने की आशंका रह सकती है। अपनी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए समाजवादी पार्टी धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर सक्रियता बढ़ा सकती है। जबकि BJP इसे सियासी अवसरवाद करार देकर पलटवार कर सकती है।

अखिलेश यादव का बड़ा बयान- आहत संत अर्थात सत्ता का अंत

बता दें कि माघ मेला से बिना स्नान किए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वापस लौटने पर अखिलेश यादव ने BJP पर सनातनी परंपरा तोड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने X पर लिखा, 'धार्मिक अनुष्ठानों में व्यवधान उत्पन्न करने वालों को क्या कहते हैं, ये भाजपाइयों को समझाने की जरूरत है क्या? हमारे महाकाव्यों का यही मूलभूत संदेश है कि घमंड के दंड से कभी कोई दुर्जन नहीं बचता है। आहत संत अर्थात सत्ता का अंत !''

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