
महेंद्र प्रताप सिंह
अयोध्या. अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट में शामिल होने को लेकर छिड़े विवाद के बीच अब मंदिर निर्माण के नाम पर चंदा बटोरने पर बवाल शुरू हो गया है। 19 फरवरी को होने जा रही रामजन्मभूमि तीर्थ न्यास की पहली बैठक में पहली चर्चा चंदा लेने के अधिकार पर ही होगी। यह विवाद वाराणसी में ज्योतिष्पीठाधीश्वर और द्वारका के शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की अगुवाई वाले रामालय ट्रस्ट के स्वर्ण-संग्रह-सपर्या अभियान के बाद उठा है। विहिप और तीर्थ न्यास ने इस अभियान पर सवाल खड़ा किया है। जबकि ट्रस्ट के संयोजक और अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने इस पर आपत्ति जतायी है। इसके बाद रामालय ट्रस्ट ने कोर्ट जाने की धमकी दी है।
राममंदिर निर्माण के लिए ज्योतिष्पीठाधीश्वर और शारदा पीठाधीश्वर,द्वारका के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की अगुवाई वाले रामालय न्यास के सचिव अविमुक्तेश्वरानंदनने सोमवार से स्वर्ण-संग्रह-सपर्या अभियान शुरू किया है। इसके तहत हर गांव से कम से कम एक ग्राम सोना इक_ा किया जाना है।
प्रमाण पत्र से सम्मानित कर रहा रामालय
रामालय ट्रस्ट दानदाताओं को प्रमाण पत्र दे रहा है। रसीद पर ज्योतिष पीठाधीश्वर और द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य, स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की तस्वीर पूजा की मुद्रा में छपी है। रामालय ट्रस्ट का कहना है कि जब तक राममंदिर नहीं बन जाता तब तब सोने का मंदिर बनाकर उसमें रामलला को विराजमान किया जाएगा। मंदिर की दीवारें और पालकी सोने की होंगी इसलिए स्वर्ण दान लिया जा रहा है। इसके तहत हर ग्राम से एक-एक ग्राम सोना संग्रह किये जाने की योजना है।
दान लेने का हक नवगठित ट्रस्ट को
नवगठित ट्रस्ट के संयोजक ट्रस्टी और जिलाधिकारी,अयोध्या अनुज कुमार झा के अनुसार किसी दूसरे व्यक्ति या संगठन को अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए चंदा लेने का हक नहीं है। रामलाल विराजमान के लिए दूसरे संगठन द्वारा चंदा इक_ा करने पर ट्रस्ट के सदस्यों ने भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि गृह मंत्रालय के गजट नोटिफिकेशन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को राम मंदिर से जुड़े हर फैसले लेने का स्वतंत्र अधिकार मिला है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कोर्ट में जाने की दी धमकी
चंदा एकत्र करने पर बवाल मचने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कोर्ट जाने की धमकी दी है। उनका कहना है कि रामलला के लिए स्वर्ण दान गलत नहीं है। क्योंकि रामालय ट्रस्ट को जगतगुरु स्वरूपानंद जी ने ढाई दशक पहले अयोध्या एक्ट के तहत चारों वैष्णवाचार्य, चारों शंकराचार्य, 13 अखाड़ा प्रमुख व अन्य संस्था प्रमुखों को मिलाकर बनाया था। इसलिए सरकार को नया ट्रस्ट गठित करने की बजाय इस ट्रस्ट को ही मंदिर निर्माण का हक देना चाहिए था। सरकार के इस फैसले को जल्द ही कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में हैं।
विहिप के ट्रस्ट के पास 18 करोड़ की नगदी
विहिप के पदाधिकारी प्रकाश कुमार गुप्त के मुताबिक विश्व हिंदू परिषद के राम जन्मभूमि न्यास के पास भी 18 करोड़ नकदी और सोना-चांदी व अन्य चल अचल संपत्ति है इसे सरकारी ट्रस्ट को ट्रान्सफर किया जाना है। जबकि, 30 करोड़ रुपए से ज्यादा के की राशि पत्थरों की खरीद, ढुलाई, पत्थर काटने और तराशने में खर्च हुई है। इसका ब्यौरा भी दिया जाएगा। इसके अलावा करीब 5 करोड़ रुपए की 42 एकड़ जमीन भी वीएचपी के अधिकार क्षेत्र में है। इसे भी ट्रस्ट को दिया जाएगा।
भक्तों के दान रहेंगे सुरक्षित, 19 को लेंगे फैसला
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी अनिल मिश्र का कहना है कि न्यास अभी कोई चंदा नहीं ले रहा। मंदिर मॉडल के सामने बने दान पात्र में भक्त दान दे रहे हैं। इतना जरूर हुआ है कि ट्रस्ट के एलान के बाद रामलला को मिलने वाला दान पहले की तुलना में दोगुना हो गया है। बुधवार को ट्रस्ट की पहली बैठक में मिलने वाले दान और लिए जाने वाले दान पर चर्चा होगी।
Published on:
17 Feb 2020 09:52 pm
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