गणेश विसर्जन के बाद अनंत चतुर्दशी को होता है भगवान विष्णु का दिन, ऐसे करें पूजा मिलेंगे हर सुख
भगवान श्री हरि विष्णु उस प्रार्थना करने वाले व्रती पर प्रसन्न हाेकर उसे सुख, संपदा, धन-धान्य, यश-वैभव, लक्ष्मी, पुत्र आदि सभी प्रकार के सुख प्रदान करते हैं।
लखनऊ. पूरे देश में इस समय गणेश उत्सव के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन जोरों से किया जा रहा है। गणेश विसर्जन के बाद अनंत चतुर्थी की धूम होती है। ऐसी मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी को भगवान विष्णु का दिन है इस दिन व्रत करने वाला व्रती यदि विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्रम् का पाठ भी करे, तो उसकी वांछित मनोकामना की पूर्ति जरूर होती है। भगवान श्री हरि विष्णु उस प्रार्थना करने वाले व्रती पर प्रसन्न हाेकर उसे सुख, संपदा, धन-धान्य, यश-वैभव, लक्ष्मी, पुत्र आदि सभी प्रकार के सुख प्रदान करते हैं। इस दिन कैसे पूजा करनी चाहिए और पूजा करते समय किन-किन बातों का ख्याल रखना चाहिए आईये हम आप को बताते हैं। क्या है अनंत चतुर्दशी आप को बता दें अनंत चतुर्दशी के दिन अनंत के रूप में श्री हरि विष्णु की पूजा की जाती है। जिस तरह रक्षाबंधन में राखी बांधी जाती है उसी प्रकार एक अनंत राखी होती है। इस राखी को अनंता भी कहा जाता है जो रूई या रेशम के कुंकुम से रंगे धागे होते हैं और उनमें चौदह गांठे होती हैं। यह 14 गांठें, 14 लोक को निरूपित करते हैं। इस धागे को वे लोग अपने हाथ में बांधते हैं, जो इस दिन अनंत चतुदर्शी का व्रत करते हैं। पुरुष इस अनंत धागे को अपने दाएं हाथ में बांधते हैं तथा स्त्रियां इसे अपने बाएं हाथ में धारण करती हैं। इस दिन भगवान को याद करके मांगने पर उनसे मन चाहा फल प्राप्त होता है। गणेश-उत्सव का समापन दिवस है अनंत चतुर्दशी अनंत चतुर्दशी का व्रत कोई सामाजिक धार्मिक उत्सव नहीं होता, लेकिन अनन्त चतुर्दशी के दिन ही गणपति-विसर्जन का धार्मिक समारोह जरूर होता है। यह लगातार 10 दिन के गणेश-उत्सव का समापन दिवस होता है और इस दिन भगवान गणपति की उस प्रतिमा को किसी बहते जल वाली नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जित किया जाता है, जिसे गणेश चतुर्थी को स्थापित किया गया होता है। पुराणों में ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत नदी-तट पर किया जाना चाहिए और श्री हरि विष्णु की लोककथाएं सुननी चाहिए। 14 वर्षों तक व्रत रखने से विष्णु लोक की होगी प्राप्ति ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को यदि कोई व्यक्ति लगातार 14 वर्षों तक नियम से करे, तो उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। भगवान सत्यनारायण के समान ही अनंत देव भी भगवान विष्णु का ही एक नाम है और इसी कारण अक्सर इस दिन सत्यनारायण का व्रत और कथा का आयोजन भी किया जाता है तथा सत्यनारायण की कथा के साथ ही अनंत देव की कथा भी सुनी-सुनाई जाती है। अनंत चतुर्दशी के व्रत का उल्लेख भगवान कृष्ण द्वारा महाभारत नाम के पवित्र धार्मिक ग्रंथ में किया गया है, जिसके सबसे पहले इस व्रत को पांडवों ने भगवान कृष्ण के कहे अनुसार विधि का पालन करते हुए किया था। यह है पूजा का समय -अनंत चतुर्थी की तिथि 15 सितंबर 2016 को 05:27 बजे शुरू होकर 16 सितंबर को 03:15 बजे तक रहेगी। -अनंत चतुर्थी पूजा का समय- 05:55 से 27:15 तक 21 घण्टे 19 मिनट तक रहेगा। -गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त 15 सितंबर को सुबह 05:56 बजे से 07:27 बजे तक है। -सुबह में शुभ मुहूर्त 10:30 बजे से 15:04 बजे तक है। -शाम को शुभ मुहूर्त 16:35 बजे से 21:04 बजे तक है। -रात में शुभ मुहूर्त 24:01बजे से 25:30 बजे तक है। - फिर 16 सितम्बर को सुबह में शुभ मुहूर्त 26:59 बजे से 29:55 बजे तक है। ऐसे करें पूजा -इस दिन सुबह उठकर स्नान करना चाहिए। -स्नान करने के बाद कलश की स्थापना करनी चाहिए। -कलश में कमल का पुष्प और कुशा का सूत्र चढ़ाना चाहिए। -भगवान को कुमकुम और हल्दी का रंग लगाना चाहिए। -हल्दी से कुशा के सूत्र को रंगा जाता है। -अनंत भगवान को याद कर उन्हें दीप, धूप एवं भोग लगाना चाहिए। -भोजन में खीर और पूरी बनायी जाती है। -पूजा के बाद सभी को अनंत सूत्र बांधा जाता है। इसलिए किया जाता है विसर्जन पौराणिक ग्रंथों में बताया गया है कि महर्षि वेदव्यास ने गणेश चतुर्थी के दिन से भगवान श्री गणेश को महाभारत की कथा सुनानी प्रारंभ की थी। लगातार दस दिन तक वेदव्यास जी श्री गणेश को कथा सुनाते रहे और गणेश जी कथा लिखते रहे। जब कथा पूर्ण होने के बाद महर्षि वेदव्यास ने आंखें खोली तो देखा कि अत्याधिक मेहनत करने के कारण गणेश जी का तापमान बढ़ा हुआ है। गणेश जी के शरीर का तापमान कम करने के लिए वेदव्यास जी पास के सरोवर में गणेश जी को ले जाते हैं और स्नान कराते हैं। अनंत चर्तुदशी के दिन गणेश जी के तेज को शांत करने के लिए सरोवर में स्नान कराया गया था, इसलिए इस दिन गणेश प्रतिमा का विर्सजन करने का चलन शुरू हुआ।