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फिल्म ‘कागज’ वाले लाल बिहारी ‘मृतक’ की कहानी में नया मोड़, अब हाईकोर्ट ने लगाया जुर्माना

High Court ने मृतक के नाम से चर्चित Lal Bihari पर 10 हजार का रुपए का हर्जाना लगाया है। लाल बिहारी की असली जिंदगी पर Film भी बनी हुई है।

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लखनऊ

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Adarsh Shivam

Mar 03, 2023

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'मृतक' के नाम से चर्चित लाल बिहारी आजमगढ़ के रहने वाले हैं। इनपर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दस हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने कहा, “याची के मामले में सच तक पहुंचने में काफी वक्त बर्बाद हुआ है।” मृतक ने कोर्ट से 25 करोड़ रुपया मुआवजा मांगा था।

फिल्म कागज से चर्चा में आए थे लाल बिहारी
सलमान खान की प्रोडक्शन में फिल्म "कागज" को बनाया गया था। फिल्म की रिलीज के दौरान लाल बिहारी उर्फ मृतक की खूब चर्चा हुई थी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर वो सुर्खियों में बने हुए हैं।

कोर्ट ने कहा, “याची के मामले में सच तक पहुंचने में काफी वक्त बर्बाद हुआ है। ये सब इसलिए हुआ, क्योंकि याची का कहना था कि उसे राज्य सरकार ने मृत घोषित किया हुआ था। जबकि सरकार ने कभी भी याची को मृत घोषित ही नहीं किया था।”

मीडिया ने लाल बिहारी को किया था अनुचित सहयोग
कोर्ट ने 25 करोड़ रुपया मुआवजे की मांग वाली लाल बिहारी उर्फ मृतक की याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की। कहा, “याची के मामले को सबसे पहले विधानसभा में एक विधायक ने हाईलाइट किया था। उसके बाद टाइम मैगजीन ने इसे प्रकाशित किया था। मीडिया ने उसे अनुचित सहयोग किया था।” यह निर्णय न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने पारित किया।

कोर्ट ने कहा, “याची का दावा है कि राजस्व रिकॉर्ड में उसे मृत घोषित कर दिया गया है। उसे अधिकारों की लड़ाई में इतना व्यस्त होना पड़ा कि वह बनारसी सिल्क साड़ी के अपने व्यवसाय पर ध्यान नहीं दे पाया, यह कहानी भी पूरी तरह झूठ है।”

लाल बिहारी के पास पर्याप्त जमीनें हैं- कोर्ट
कोर्ट ने कहा, “लाल बिहारी 1972 से अपने गांव में रहते हुए सभी अधिकारों का प्रयोग कर रहा है। उसने जमीनें भी खरीदीं, उसके पास पर्याप्त जमीनें हैं। उनका एक बेटा गैस एजेंसी चलाता है। रिश्तेदारों ने उसकी गैर मौजूदगी का फायदा उठाते हुए राजस्व रिकॉर्ड में नाम चढ़वा लिया, लेकिन याची को कभी भूत या घोस्ट कहकर नहीं पुकारा गया। इसका कोई साक्ष्य नहीं है।”

लाल बिहारी उर्फ मृतक का कहना था, “साल 1976 में उसके कुछ रिश्तेदारों ने उसकी जमीन कब्जा करने के लिए सरकारी अधिकारियों से मिलकर मृत घोषित करवा दिया था। खुद को जिंदा साबित करने के लिए उसने लम्बी लड़ाई लड़ी। राजस्व रिकॉर्डों में वह पूरे 18 साल मृतक के तौर पर दर्ज था।”

लाल बिहारी ने मुआवजे में मांगा था 25 करोड़ रुपए
फिर 30 जून साल 1994 को प्रशासन ने उसे जीवित माना। इस लम्बी लड़ाई में उसके साथ हुए दुर्व्यवहारों के लिए 25 करोड़ रुपया मुआवजा के तौर पर राज्य सरकार से दिलाने की मांग न्यायालय से की थी। उस समय टाइम मैगजीन ने प्लाइट ऑफ लिविंग डेड शीर्षक से याची की कहानी छापी थी।

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इस पर हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, बोस्टन से याची को आईजी नोबेल पुरस्कार भी मिल चुका है। लाल बिहारी उर्फ मृतक पर सलमान खान की प्रोडक्शन में सतीश कौशिक ने फिल्म कागज बनाई थी। इस फिल्म में लाल बिहारी का रोल पंकज त्रिपाठी ने निभाया है।

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