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ऐसे बचा सकते हैं इनकम टैक्स, जानिए इन पांच धाराओं के बारे में

फाइनेंशियल ईयर के खत्म होते होते इनकम टैक्स भरने वालों को समस्या आने लगाती है।

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लखनऊ

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Akansha Singh

Feb 28, 2018

lucknow

लखनऊ. फाइनेंशियल ईयर के खत्म होते होते इनकम टैक्स भरने वालों को समस्या आने लगाती है। इनकम टैक्स कई तरीकों से फ़ाइल किया जाता है। धारा 80 c के बारे में तो आप सभी जानते होंगे लेकिन आज आपको लखनऊ के इंदिरा नगर निवासी सीए अभिनव कुमार बताएंगे की टैक्स कैसे बचाया जा सकता है।

सेविंग्स अकाउंट पर ब्याज और धारा 80TTA

आम तौर पर लोगों को यही मालूम है कि सेविंग्स बैंक अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है। असल में ब्याज की रकम टैक्सेबल होने के बावजूद, धारा 80TTA के अनुसार 10,000 रुपये की टैक्स कटौती का लाभ उठाया जा सकता है। आप सेविंग्स बैंक अकाउंट के लिए धारा 80TTA के अंतर्गत 10,000 रुपये तक के ब्याज के लिए टैक्स कटौती के लिए क्लेम कर सकते हैं। यह जान लें कि बैंक फिक्स्ड डिपोजिट जैसे अन्य निवेश विकल्पों पर मिलने वाले ब्याज पर यह सुविधा नहीं मिलती है। इसलिए प्रभावशाली ढंग से यदि आपने अपने सभी सेविंग बैंक अकाउंट्स से वित्तीय वर्ष में 15,000 रुपये ब्याज कमाया है तो आपको धारा 80TTA के अंतर्गत 10,000 रुपये की कटौती का लाभ उठाने के बाद सिर्फ 5000 रुपये पर टैक्स देना होगा।

धारा 2(28A) के अनुसार लोन प्रोसेसिंग फीस पर कटौती

जब टैक्स और घर खरीदने की बात आती है तो उधारकर्ताओं द्वारा काफी हद तक होम लोन के मूलधन और ब्याज पर मिलने वाली टैक्स कटौती पर विचार किया जाता है। यदि आपने कोई लोन लिया है जहाँ बैंक या वित्तीय संस्थान ने आपसे लोन प्रोसेसिंग फीस लिया है तो आप आईटी अधिनियम की धारा 2(28A) का इस्तेमाल करके टैक्स कटौती का लाभ उठा सकते हैं। धारा 2(28A) के अंतर्गत, धारा 2(28A) के अनुसार पैसे उधार लेते समय या कोई कर्ज लेते समय ली गई सर्विस फीस पर टैक्स कटौती का लाभ मिलता है। चूंकि लोन प्रोसेसिंग फीस को एक सर्विस फीस माना जाता है इसलिए एक टैक्स कटौती के रूप में जायज तरीके से इसे क्लेम किया जा सकता है।

किसी जानलेवा बीमारी का इलाज और धारा 80DDB

पुरानी और जानलेवा बीमारियों से लड़ना, मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से काफी मुश्किल हो सकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि इस लड़ाई में आपकी आर्थिक स्थिति ख़राब न हो जाए, आयकर अधिनियम की धारा 80DDB के अंतर्गत, इलाज के आर्थिक बोझ को कम करने के लिए टैक्स कटौती का लाभ प्रदान किया जाता है। इस धारा के अंतर्गत, एड्स, कैंसर और न्यूरोलॉजिकल जैसी ख़ास बीमारियों के इलाज पर होने वाले खर्च के लिए, व्यक्तियों को 40,000 रुपये तक और 60 और 80 साल से ज्यादा उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को 1,00,000 रुपये तक, टैक्स कटौती का लाभ दिया जाता है।

धारा 80G, 80GGA और 80GGC के अंतर्गत दान

दान एक अच्छा कर्म होने के साथ-साथ आपको टैक्स कटौती का लाभ उठाने में भी मदद कर सकता है। धारा 80G के अंतर्गत, विभिन्न फंड्स या मंदिरों में दिए गए किसी भी दान पर, 50 से 100% तक टैक्स कटौती का लाभ उठाया जा सकता है। इसके अलावा, आप धारा 80GGC के अंतर्गत किसी भी राजनीतिक दल को दिए गए दान के लिए भी टैक्स कटौती का लाभ उठा सकते हैं जहाँ दान की रकम पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है। वैज्ञानिक अनुसंधान की सुविधा प्रदान करने वाली और 35(1) (ii), 35(1) (iii), 35CCA, 35CCB के अंतर्गत सरकार द्वारा अनुमोदित विश्वविद्यालयों या संस्थानों को दिए गए दान पर भी, धारा 80GGA के अंतर्गत टैक्स कटौती का लाभ मिलता है।

मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम का भुगतान और धारा 80D के अंतर्गत कटौती

लगातार बढ़ रहे स्वास्थ्य सेवा सम्बन्धी खर्चों को देखते हुए, एक मेडिक्लेम पॉलिसी आज प्रत्येक परिवार की एक जरूरत बन गई है। जहाँ एक तरफ एक मेडिकल इंश्योरेंस आपको और आपके परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करता है वहीं दूसरी तरफ इससे कई अन्य लाभ भी है। क्या आपको पता है कि पॉलिसी के लिए दिए गए प्रीमियम की रकम, टैक्स बचाने में आपकी मदद कर सकती है?

आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80D के अंतर्गत आपको अपने लिए, अपनी पति/पत्नी और बच्चों के लिए दिए गए सभी हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 25,000 रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। यदि आप 60 साल से ज्यादा उम्र के एक वरिष्ठ नागरिक हैं तो आप जैसे लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए 2018 की बजट में टैक्स छूट की यह सीमा 30,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई है। इसलिए यदि आपके माता-पिता, 60 साल से ज्यादा उम्र के, वरिष्ठ नागरिक हैं तो आप 50,000 रुपये तक अतिरिक्त कटौती के लिए क्लेम कर सकते हैं जिससे कटौती की कुल रकम 75,000 रुपये हो जाती है। इस टैक्स कटौती का लाभ उठाने के लिए बस यह सुनिश्चित कर लें कि प्रीमियम की रकम, नकद में न दी गई हो।