जहाँ की स्थिति देख लोगो के सांसे कांप गयी। मलवे मे दबे बच्चे महिलायें चीत्कारें भर रही थी। बुजुर्ग सिसकियां ले रहे थे और देखते ही देखते उनकी सिसकियां दबी की दबी रह गयी। देर रात तक 133 यात्री इस ट्रेन की सुनामी मे अपनी जान गंवा चुके थे। आलम यह था कि इस भयावह सदमे मे लोग अपने पराये की पहचान नही कर पा रहे थे। बच्चे व महिलायें बिलखती हुयी मलवे मे दबे लोगो मे अपनों की पहचान कर रही थी। बस मुंह से इतना ही निकल रहा था, कि हे भगवान ये हम पर कैसा जुल्म ढाया है।