
Lucknow Metro
लखनऊ।लखनऊ मेट्रो देश की उन मेट्रो में से एक हैं जहां सबसे अधिक संख्या में महिलाऐं कार्य कर रही हैं। 1 दिसंबर को हुए ट्रायल रन की तरह ही एक बार फिर मेट्रो की कमान महिलाओं के हाथ ही रही। पटरियों पर नई नवेली दुल्हन की तरह तैयार मेट्रो ट्रेन के लिए ख़ास कॉन्फिडेंस, नॉलेज और टेक्नीक के आधार पर मेट्रो पायलटों का चयन किया गया था। जिस ट्रेन में सीएम योगी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल रामनाईक और अन्य वीआईपी सवार थे उसकी काम भी महिलाओं के हाथ ही थी। उनका साथ दो युवकों ने दिया।
आपस में हाथ मिलाकर दी बधाई
चारों पायलट सफर को लेकर उत्साहित दिखे। उनकी आंखों में खुशी के भाव नजर आ रहे थे. आखिर हो भी क्यों न, उनका नाम जो लखनऊ मेट्रो के इतिहास में जुडऩे जा रहा था। सीएम के आते ही पूजा, प्रियंका, निखिल और अमन सभी ने अपनी-अपनी जिम्मेदारी संभाल ली। ट्रेन के चारबाग से वापस ट्रांसपोर्ट नगर आने पर एक दूसरे को हाथ मिलाकर बधाई भी दी।
पायलट 1: पिता करते हैं बर्फ का काम
मूल रूप से आगरा की रहने वाली पूजा के पिता अशोक कुमार बर्फ का काम करते हैं। उनकी मां सूरजमुखी गृहणी हैं। पूजा ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया हुआ है। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता का सपना था कि वो कुछ ऐसा करें जिससे उनके परिवार का नाम रोशन हो जाए। भावुक हुई पूजा ने कहा कि आज उन्होंने कर दिखाया है। पूजा ने कहा कि शहर की जनता सुरक्षित सफर का अहसास करेगी। हालांकि सीएम से मुलाकात न होने से वह थोड़ी निराश थी।
पायलट 2 : ठीक से कार नहीं चला पाती, मेट्रो दौड़ाई
पायलट प्रियंका चौरसिया मिर्जापुर की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी पढाई मिर्जापुर में पूरी की है। इनके पास स्टेशन कंट्रोलर एंड ट्रेन ऑपरेटर का डिप्लोमा है जो कि उन्होंने लखनऊ से किया है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहाकि वे आज बहुत खुश हैं। आज तक वे ठीक से कार भी नहीं चाल पाई लेकिन आज मेट्रो दौड़ा रही हैं।
पायलट 3 : किसान का बेटा पहले दौड़ा चुका है दिल्ली मेट्रो
निखिल उत्तम फतेहपुर, जहानाबाद के रहने वाले हैं। उनके पिता किसान हैं। निखिल लंबे समय तक दिल्ली मेट्रो की जिम्मेदारी निभा चुका है। अब उन्हें लखनऊ मेट्रो की जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया हुआ है। पढ़ाई में वह बेहद औसत रहे हैं लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं हारी।
चौथा पायलट : पेरेंट्स के मोटिवेशन ने बनाया पायलट
पायलट अमन श्रीवास्तव मूल रूप से बदायूं के रहने वाले हैं। इन्होने गाजियाबाद से बीटेक (इलेक्ट्रिकल्स) किया है। उन्होंने बताया कि मेट्रो में जॉब करना बिल्कुल अलग तरह का है। और यही वजह है कि उन्हें ये पसंद है। पहले लगता था कि हर कोई 'ट्रेन ड्राइवर' कहकर बुलाएगा लेकिन पैरेंट्स ने समझाया। उनकी बातों से मेरे विचारों में बदलाव आया और आज मैं बेहद खुश हूं।
Updated on:
05 Sept 2017 09:26 pm
Published on:
05 Sept 2017 09:25 pm
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