
सार्वजनिक स्थलों पर जन्माष्टमी व गणेश पंडाल में भीड़ नहीं लगने पायेगी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी पर विशाल रूप में होने वाले सार्वजनिकम रूप से बनने वाली झांकियां इस बार उतने बड़े पैमाने पर आयोजित नहीं होगी। प्रदेश में इस बार इन दोनों पर्वों पर कोई जुलूस या शोभा यात्रा भी नहीं निकलेगी। ऐसा कोरोना प्रोटोकॉल के चलते निर्णय लिया गया है। भारी संख्या में भक्तों द्वारा हर वर्ष होने वाला मूर्ति विसर्जन भी सीमित संख्या में करना होगा। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से मुख्यसचिव द्वारा प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और जिला पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि कोरोना प्रोटोकॉल के तहत इस वर्ष हर वर्ष की भांति भीड़-भाड़ वाले धार्मिक कार्यक्रमों को सांकेतिक रूप में या छोटे स्तर पर मनाया जाये।
उत्तर प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म स्थान मथुरा और बाल लीलाओं का स्थान वृंदावन के अलावा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पुलिस विभाग बहुत बढ़-चढ़ कर मनाता आ रहा है। यूपी की पुलिस लाइनों में आयोजित होने वाले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में विशिष्ट व्यक्तियों का जमावड़ा होता है। लखनऊ पुलिस लाइन में अब तक अनेक राज्यपाल और मुख्यमंत्री आ चुके हैं। जिलों में ग्रामीण स्तर और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने के साथ उनकी भव्य झांकी निकाल कर विसर्जन का कार्यक्रम होता है।
इसी विगत वर्षों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना, झांकी व विसर्जन का व्यापक कार्यक्रम होने लगा है।सूत्रों के अनुसार कोरोना के चलते प्रदेश प्रशासन समय रहते इस आशय की गाइड लाइन जिले स्तर तक भेज दिया है। जिसमें यह निर्देश दिया गया है कि जिला प्रशासन अपने-अपने जिलों के पूजा समितियों के साथ की बैठककर कोरोना की गाइड लाइन समझाते हुए भीड़-भाड़ से बचने का निर्देश दे। श्रद्धालु मंदिरों में पांच-पांच की संख्या में मास्क लगा कर दो गज की दूरी का पालन करते हुये दर्शन करेंगे। झांसी, आगरा, लखनऊ और वाराणसी में मराठी समाज की अच्छी संख्या होने के कारण यहां गणेशोत्सव व्यापक स्तर पर आयोजित होता है।
Published on:
09 Aug 2020 08:21 pm
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