
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना मुश्किल हो गया है क्योंकि चाहे आप कितने ही बड़े रसूखदार क्यों न हों, आवंटित टाइम स्लॉट से पहले डीएल के लिए बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी नहीं करा पाएंगे क्योंकि अब यूपी में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए जुगाड़ भी काम नहीं आएगी। संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने लर्निंग व परमानेंट डीएल के ऑनलाइन आवेदन पर बायोमीट्रिक प्रक्रिया के लिए जिस दिन बुलाया है, आपको उसी दिन यह प्रक्रिया पूरी करानी पड़ेगी। नहीं आपका ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बन पाएगा।
परिवहन विभाग द्वारा बुलाने की तारीख पर नहीं आने पर अगले दो दिन की और मोहलत दी जाएगी। इसके बावजूद यदि आवेदक बायोमीट्रिक प्रक्रिया के लिए नहीं आ पाता है तो उसे दोबारा टाइम स्लॉट लेना पड़ेगा। यह व्यवस्था 7 फरवरी शाम से प्रभावी हो गई है। दरअसल, परिवहन विभाग ने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) से वीआईपी आवेदक के बुलाने की तारीख यानी आवंटित टाइम स्लॉट में बदलाव का अधिकार छीन लिया है। इसके बाद एनआईसी ने सारथी सॉफ्टवेयर में यह प्रावधान कर दिया, जिससे प्रदेश भर के एआरटीओ अब वीआईपी के लिए बुलावे की तारीख को बदल नहीं पाएंगे।
परिवहन विभाग की नई व्यवस्था से उन लोगों की परेशानी शुरू हो गई है, जो दूसरे राज्यों में रहकर नौकरी या शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे आवेदक गृह जनपद से डीएल बनवाने के लिए आवंटित टाइम स्लॉट को जुगाड़ से बदला लेते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पहले दिन 10 फरवरी को सर्वाधिक प्रभाव लखनऊ में देखने को मिला। यहां 60 वीआईपी डीएल की बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी किए बिना आरटीओ से लौट गए। इनमें राजनेता, उनके करीबी और बड़े पदों पर काबिज अफसर शामिल थे।
लखनऊ के आरटीओ का कहना है कि रोजाना 450 आवेदक में से 50 से 70 वीआईपी बायोमीट्रिक प्रक्रिया के लिए आते हैं। वर्तमान में लर्निंग डीएल बनवाने की वेटिंग लगभग डेढ़ माह चल रही है। अब आवेदक को लर्निंग व परमानेंट डीएल के लिए जो टाइम स्लॉट की तारीख मिलेगी, उसी पर और उसके दो दिन बाद तक बायोमीट्रिक प्रक्रिया कराने की सहूलियत मिलेगी।
Published on:
11 Feb 2020 09:49 pm
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