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Krishna Janmashtami 2019 : कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की इस विधि से करें पूजा, हर मनाकमना होगी पूरी

Krishna Janmashtami 2019 : कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) पर ग्रह गोचरों का महासंयोग कई सालों बाद बना है।

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लखनऊ

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Neeraj Patel

Aug 22, 2019

Krishna Janmashtami 2019 : कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की इस विधि से करें पूजा, हर मनाकमना होगी पूरी

Krishna Janmashtami 2019 : कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की इस विधि से करें पूजा, हर मनाकमना होगी पूरी

लखनऊ. भाद्रपद माह की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। भगवान कृष्ण का जन्म को लेकर उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में जन्माष्टमी का त्यौहार 23 और 24 अगस्त को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। इस साल पड़ने वाली जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को खुश करने के लिए 23 अगस्त को व्रत रखा जाएगा और 24 को कृष्णाष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इस बार की कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) को लेकर लोगों को दुविधा हो रही है कि इस त्यौहार की सही तिथि क्या है। इसलिए इस बार कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि को लेकर कोई दुविधा में रहे।

इस बार की कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) पर ग्रह गोचरों का महासंयोग कई सालों बाद बना है। इस तिथि पर छत्र योग, सौभाग्य सुंदरी योग और श्रीवत्स योग बन रहा है। पूजन और व्रतियों के लिए यह त्यौहार फलदायी सिद्ध होगा। 14 वर्षों के बाद तीन संयोग एक साथ बना है। जन्माष्टमी के समय सूर्य देव अपनी सिंह राशि में रहेंगे। भगवान श्रीकृष्ण की प्राण प्रतिष्ठा रात्रि 12.10 बजे के बाद ही सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों का अपूर्व संयोग से मध्य रात्रि में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त (Krishna Janmashtami Shubh Muhurat)

कृष्‍ण की पूजा नीशीथ काल यानी कि आधी रात में किये जाने की परंपरा है।
कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त इस बार 00:01 से 00:45 तक रहेगा।
सूर्योदय के बाद पारण का समय – 05:59 रहेगा।
24 अगस्त को सूर्योदय से पहले रोहिणी नक्षत्र समाप्त हो जाएगा।
23 अगस्त को अष्टमी तिथि 08:08 प्रारंभ हो जाएगी।
24 अगस्त को अष्टमी तिथि 08:31 समाप्त हो जाएगी।

कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि (Krishna Janmashtami Puja Vidhi)

सभी भक्त कृष्ण जन्‍माष्‍टमी के दिन सुबह स्‍नान के बाद भगवान के समक्ष व्रत का संकल्‍प लें और उसके अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्‍टमी तिथि के समाप्त होने के बाद ही व्रत खोल सकते हैं। व्रत के समय केवल आप फलाहार ही कर सकते हैं। इस बीच आपको कुछ नमकीन या नमक से बनी हुई चीजों से बचना चाहिए। नहीं तो आपका व्रत अधूरा रह जाएगा। जिससे आपकी आपकी मनोकामना पूरी नहीं हो पाएगी। अगर आप सही विधि से कृष्ण जन्‍माष्‍टमी भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं तो आपकी पूरी मनोकामना पूरी हो जाएगी।