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इस महीने बचेगा 10 लाख लीटर पानी, 1.5 लाख लोगों को मिलेगा फ़ायदा

वीआईपी मूवमेंट के दौरान सड़क धोने, आंदोलनों और राजनीतिक और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान भी भारी मात्रा में पानी का प्रयोग किया जाता है।

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Dikshant Sharma

May 03, 2016

water saving

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लखनऊ.राजधानी में बढ़ती गर्मी को देखते हुए अब वीआईपी क्षेत्रों में 30 जून तक नगर निगम ने पानी छिड़काव नहीं करने का फैसला किया है। इसमें कभी भी वीआईपी क्षेत्र, राजनीतिक रैलियों और सार्वजनिक आयोजनों के स्थानों की सफाई के लिए पानी प्रदान नहीं किया जाएगा।

जानकारों की माने तो औसत तौर पर 10 लाख से अधिक लीटर पानी हर महीने में वीआईपी क्षेत्रों और सड़कों पर छिड़काव में लगता है। वीआईपी मूवमेंट के दौरान सड़क धोने, आंदोलनों और राजनीतिक और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान भी भारी मात्रा में पानी का प्रयोग किया जाता है। इन गतिविधियों के लिए पानी के उपयोग को रोकने से लगभग 10 लाख लीटर तक पानी बचाया जाएगा।

महापौर दिनेश शर्मा ने बताया कि पानी का संकट का आलम यह है कि कुछ क्षेत्रों में लोगों को 2 किलोमीटर से भी अधिक सफर कर पानी लाना पड़ता है। पानी के उपयोग पर ऐसी स्थिति में अंकुश लगाना चाहिए। इस तरह राजनीतिक और सार्वजनिक आयोजनों के लिए पानी बहाना जनता के हित के खिलाफ है।
पूर्व में कितना बहा पानी
-12,000 लीटर की क्षमता के छह टैंकर, यानि 72,000 लीटर पानी को उच्च न्यायालय भवन के उद्घाटन के दिन भवन के निकट सड़क धोने के लिए इस्तेमाल किया गया था।

-अंबेडकर जयंती के अवसर पांच टैंकरों (60,000 लीटर) को एक राजनीतिक रैली के दौरान आयोजन स्थल के आसपास पानी छिड़क के लिए भेजा गया था।

-लगभग तीन टैंकर (36,000 लीटर) प्रतिदिन वीआईपी क्षेत्रों में सड़क साफ़ करने के लिए प्रयोग किये जाते हैं।

-शादी-विवाह के मौसम में दो-तीन टैंकरों (20-30,000 लीटर) उच्च अधिकारियों और राजनेताओं के व्यक्तिगत अनुरोध पर समारोह स्थल पर छिड़काव के लिए इस्तेमाल किया जाते हैं।

-आशियाना में लखनऊ महोत्सव और झूलेलाल पार्क में आयोजित महोत्सव में लगभग 1.20 लाख लीटर (10 टैंकरों) का इस्तेमाल किया गया था।

महापौर ने कहा कि जल के उपयोग पर अंकुश लगाने के बाद लगभग 10 लाख लीटर पानी इस माह बचेगा। इससे प्रतिदिन 6 से 7 हज़ार लोगों की जलापूर्ति की जा सकेगी।

अपर नगर आयुक्त अवनीश सक्सेना ने बताया कि उम्मीद है कि 30 जून का मानसून शहर में दस्तक दे देगा जो पानी संकट को दूर करने में मददगार होगा। इसलिए 30 जून के बाद ही इन सेवाओं को दुबारा शुरू करने पर विचार किया जाएगा। बता दें कि निगम ने इस सन्दर्भ में जनता की मांग और आवश्यकता के आधार कुछ अपवादों को अलग रखा गया है।

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