
फोटो सोर्स- पत्रिका
Lucknow Aliganj fire incident: लखनऊ में 15 लोगों की मौत का कारण बनी बिल्डिंग को 10 साल पहले ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था लेकिन मकान मालिक की शिकायत पर कार्रवाई को पूरी तरह से रोक दिया गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब 15 लोगों की मौत के बाद प्रशासन की आंखें खुली और पुरानेे रिकॉर्डों को खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही जिस अधिकारी ने 10 साल पहले बिल्डिंग को गिराने के आदेश को रद्द कर दिया था उसके खिलाफ भी कार्रवाई करने के लिए शासन को से सिफारिश की गई है।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ के अलीगंज थाना क्षेत्र के उषा मेहता मार्ग पुरानिया चौराहा की तीन मंजिला इमारत में 22 जून सोमवार को आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। जिनमें अधिकांश 20 से 24 साल के छात्र थे। तीन मंजिला कमर्शियल उपयोग में ली जा रही बिल्डिंग में आग लगने की घटना ने शासन प्रशासन को हिला कर रख दिया। बिल्डिंग के बेसमेंट ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर में पेट शॉप और क्लिनिक संचालित हो रहा था जबकि दूसरी मंजिल पर 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम डेवलपमेंट करने वाली कंपनी हेड हूपर स्टूडियो (Head Hopper Studio) था।
अलीगंज कि दुर्घटनाग्रस्त बिल्डिंग का प्लाट एलडीए से 11 जुलाई 1980 में आवंटित किया गया था। 1992 वर्ग फीट का यह प्लाट हायर परचेज योजना के अंतर्गत खरीदी गई थी। सन 1980 के नवंबर महीने में अवंटी को कब्जा दिया गया था। जिसे 19 जनवरी 2013 को वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला को बेच दी गई। 7 अगस्त 2014 को एलडीए ने उनके नाम नामांतरण कर दिया।
एलडीए के अधिकारियों के अनुसार 20 अगस्त 2014 को सेल्फ सर्टिफिकेशन योजना के अंतर्गत प्लाट को आवासीय भवन के रूप में इस्तेमाल करने की स्वीकृति दी गई। इस संबंध में एक हलफनामा भी भवन मलिक की तरफ से दाखिल किया गया था। लेकिन 2016 में लखनऊ विकास प्राधिकरण को जानकारी हुई कि भवन का कमर्शियल इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसके बाद 10 मई 2016 को एलडीए ने बिना अनुमति वाले हिस्से को गिराने करने का नोटिस जारी किया। लेकिन भवन स्वामी की अपील पर दो महीने बाद ही नोटिस को रद्द कर दिया गया। इस संबंध में बताया गया कि भवन मालिक ने शिकायत की है कि ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी करने के पहले उन्हें नहीं सुना गया। इसके बाद 5 जुलाई 2016 को ध्वस्तीकरण का आदेश रद्द कर दिया गया।
15 लोगों की मौत के बाद अब एलडीए पुराने रिकॉर्ड को खंगाल रहा है। संबंधित इंजीनियर और अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। पूछताछ का मुख्य बिंदु आवासीय भवन का कॉमर्शियल भवन के रूप में कैसे इस्तेमाल किया गया है। किन परिस्थितियों में ध्वस्तीकरण का आदेश रद्द किया गया इसकी भी जांच की जा रही है।
एक सवाल के जवाब में संबंधित अधिकारी ने बताया कि 12 मीटर ऊंची बिल्डिंग या तीन मंजिला इमारत को अग्निशमन से एनओसी की जरूरत नहीं पड़ती है। इधर शासन ने अग्निकांड को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। इंदिरा नगर फायर स्टेशन अधिकारी, एलडीए के इंजीनियर और बिजली विभाग के अधिकारियों को निलंबित किया है जो बिल्डिंग से संबंधित मामलों को अनदेखा करने का दोषी पाया गया है।
Published on:
24 Jun 2026 09:20 am
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
