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लखनऊ. अयोध्या केस में हिंदू पक्ष की तरफ से हिंदू महासभा ने सोमवार को पहली पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की। पुनर्विचार याचिका में हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में मुस्लिम पक्षकारों को पांच एकड़ जमीन देने के फैसले का मुद्दा उठाया है।
हिन्दू महासभा का कहना है कि विशेष पीठ ने अपने फैसले में माना है कि विवादित जमीन के अंदरूनी हिस्से और बाहरी हिस्से पर हिंदुओं का दावा मजबूत है। ऐसे में मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ ज़मीन नहीं दी जानी चाहिए। हिंदू महासभा के वकील विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की।
सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में अपना फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या की विवादित ढांचे वाली जमीन को रामलला विराजमान को दिया वहीं मुस्लिम पक्षकारों को अदालत ने पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था।
मुस्लिम पक्षों की ओर से छह पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई है। 9 नवंबर पुनर्विचार याचिकाएं दायर करने का अंतिम दिन था।
शुक्रवार छह दिसम्बर को पीस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। पीस पार्टी ने अपनी याचिका में कहा है कि 1949 तक विवादित स्थल पर मुस्लिमों का अधिकार था। लिहाजा कोर्ट को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
2 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में मूल याचिकाकर्ता एम सिद्दीक के कानूनी उत्तराधिकारी मौलाना सैयद अशद रशीदी ने पहली समीक्षा याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में कहा गया था कि इस मामले में 'पूरा न्याय' बाबरी मस्जिद को दोबारा बनाने का आदेश देने से ही हो सकता है।
Published on:
10 Dec 2019 11:15 am

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