
मंडी एक्ट में बड़ा बदलाव : अब सिर्फ सात सब्जियों पर देना होगा मंडी टैक्स, 24 सब्जियां और 22 फल मण्डी टैक्स फ्री, खुशी से झूमे किसान
लखनऊ. योगी सरकार ने किसानों की आय बढ़े इसके लिए एक नई व्यवस्था की है। कोरोना और लॉकडाउन की विवशता को देखते हुए प्रदेश की मंडियों में बिकने वाले 53 तरह के फल व सब्जियों में से 46 तरह की फल-सब्जियां को मंडियों में बेचने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। अब किसान इन 46 तरह की फल-सब्जियों को स्थानीय स्तर पर या किसानों के डोर स्टेप (दरवाजे-खेत) पर बेच सकेंगे। इससे जहां किसान को मंडी शुल्क नहीं देना पड़ेगा वहीं मंडियों में भीड़ कम हो सकेगी। साथ ही किसानों की इनकम में बढ़ोत्तरी हो सकेगी। इसके बाद अब सिर्फ सात सब्जियों पर देना मंडी टैक्स होगा। सरकार के इस फैसले से मंडी परिषद को सालाना 124.58 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा।
उत्तर प्रदश कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम में संशोधन के प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई। उत्तर प्रदेश सरकार ने 46 फल-सब्जियों को मंडी टैक्स से मुक्त कर दिया है। साथ ही किसान को मंडी के बाहर इन फल-सब्जियों की बिक्री की अनुमति प्रदान की है। नए नियम के तहत अब किसान अपनी सुविधा से फार्म गेट पर अथवा कहीं भी किसी भी व्यापारी या प्रसंस्करण इकाई को अपना उत्पाद बेचने को स्वतंत्र होगा। वह चाहे तो सीधे सामान्य उपभोक्ताओं को भी अपने उत्पाद बेच सकेगा। साथ ही डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से देश में कहीं भी अपना माल बेचकर लाभकारी मूल्य हासिल कर सकता है।
इन 46 तरह की फल-सब्जियां जिनमें आम, सेब, हरी मटर, केला, अनार, पत्ता गोभी-फूल गोभी, मौसम्बी, अंगूर, पपीता, तरबूज, संतरा, बैगन, खीरा, कद्दू, लौकी, गाजर, अरवी, अमरूद, मूली, पेठे वाला कद्दू, भिण्डी, परवल, कच्चा कटहल, करेला, किन्नू, खरबूज, शकरकन्द, चीकू, लीची, आँवला, कुन्दरू, नाशपाती, जिमीकन्द, टिण्डा, बेर, माल्टा, आड़ू, हरी लोबिया, पका कटहल, चकोतरा, लोकाट, खुबानी, ब्रोकली, सिंघाड़ा, ग्रेप फ्रूट शामिल हैं मंडी टैक्स हटाया गया है।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि अधिसूचना से बाहर किए गए फल-सब्जियों के व्यापार की सुविधा मंडी परिषद के अपनी अधिसूचित मण्डियों में पूर्व की भांति जारी रहेगी। हालांकि अब मंडी शुल्क के स्थान पर उन्हें सेवा शुल्क या यूजर चार्ज ही व्यापारियों से लिया जाएगा। वह भी तब जब मंडी परिसर में क्रय-विक्रय होगा। इससे कारोबार करने में सुलभता के उद्देश्यों की पूर्ति होगी।
अब सिर्फ सात सब्जियों पर देना होगा मंडी टैक्स :- इस फैसले से मंडी परिषद को सालाना 124.58 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा। इन संशोधनों के बाद यूपी में 53 तरह के फल व सब्जियों में सिर्फ आलू, प्याज, टमाटर, अदरक, लहसुन, मिर्च और नींबू के कारोबार पर ही मंडी शुल्क देना होगा।
अब व्यापारी कहीं से भी माल खरीद सकता :- मतलब, अब व्यापारी कहीं से भी माल खरीद सकता है। उसे मंडी परिषद से अनुमति लेने के बजाय उस स्थान के बारे में सिर्फ सूचित करना होगा। कृषक-उपभोक्ता बाजार व्यवस्था के तहत निजी क्षेत्र में व मंडी परिषद की ओर से कृषक उपभोक्ता बाजार विकसित करने की व्यवस्था भी की गई है। इसकी अनुमति शासन द्वारा अधिकृत प्राधिकारी देगा।
Published on:
07 May 2020 01:04 pm

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