डॉ.राकेश कपूर का नाम लखनऊ में बेहद परिचित नाम है। यूरोलॉजी के मरीजों के लिए डॉ.राकेश कपूर भगवान की तरह हैं।
लखनऊ . डॉ.राकेश कपूर का नाम लखनऊ में बेहद परिचित नाम है। यूरोलॉजी के मरीजों के लिए डॉ.राकेश कपूर भगवान की तरह हैं। सोमवार को अपनी 31 वर्ष की सेवा के बाद डॉ.राकेश कपूर ने पीजीआई लखनऊ को अलविदा कह दिया। काम के प्रति उनका समर्पण इतना था कि अपने आखिर दिन भी उन्होंने प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित एक गंभीर मरीज का रोबोट से सफल आपरेशन किया।
राकेश कपूर लखनऊ के चौक फूलबाग के मूल निवासी हैं। उन्होंने केजीएमयू लखनऊ से एमबीबीएस और एमएस किया, इन दोनों कोर्स में उन्होंने गोल्ड मैडल हासिल किया। डॉ.राकेश कपूर ने वर्ष 1988 में पीजीआई में यूरोलॉजी विभाग में फैकल्टी सदस्य के रूप में ज्वाइन किया। उन्होंने यूरोलॉजी डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी बहुत अच्छी तरह से निभाई है। नवम्बर 2014 में डाक्टर कपूर ने संजय गांधी पीजीआई संस्थान के निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला। नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के फेलो भी रह चुके हैं। उन्होंने पीजीआई में रोबोटिक सर्जरी शुरू करने के साथ कई नई तकनीक को शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने यूरोलॉजिस्ट के करीब तीन हजार से ज्यादा सफल गुर्दा प्रत्यारोपण किया। 10 हजार ऑपरेशन और 250 से अधिक रिर्सच पेपर पेश किया।
एसजीपीजीआइ निदेशक प्रो. राकेश कपूर का कार्यकाल पूरा हो चुका है। नए निदेशक की नियुक्ति तक उनका कार्यकाल बढ़ाया गया था। मगर, उन्होंने प्रोफेसर यूरोलॉजी के पद से भी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए अनुरोध किया था। इसे मंजूरी प्रदान की गई थी।