
शाहजहांपुर की शुभांगी स्वरूप उड़ाएंगी नौसेना का डॉर्नियर विमान
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. महिला सशक्तिकरण की दिशा में यूपी की दो बेटियों ने कमाल का काम किया है। दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक राफेल को उड़ाने की जिम्मेदारी वाराणसी की फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह पर है। अब भारतीय नौसेना के डॉर्नियर विमान को उड़ाने की जिम्मा जिन तीन महिला पायलटों को मिला है उनमें एक लेफ्टिनेंट शुभांगी स्वरूप शाहजहांपुर के तिलहर की रहने वाली हैं।
केरल के कोच्चि में स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में 27वीं डॉर्नियर ऑपरेशनल फ्लाइंग ट्रेनिंग कोर्स में शामिल छह पायलटों में तीन महिला पायलट थीं। भारतीय नौ सेना के महिला पायलटों के पहले बैच में शामिल तीनों महिला पायलटों ने डॉर्नियर विमान पासिंग आउट परेड में शामिल होकर विमान उड़ाने की अर्हता प्राप्त कर ली हैं। इनमें बिहार के मुजफ्फरपुर की लेफ्टिनेंट शिवांगी, यूपी के शाहजहांपुर के तिलहर की लेफ्टिनेंट शुभांगी स्वरूप और नयी दिल्ली के मालवीय नगर की लेफ्टिनेंट दिव्या शर्मा शामिल हैं। इन तीनों बेटियों को 'ऑपरेशनल मैरीटाइम' के रूप में स्नातक की उपाधि मिली है। इन तीनों महिला पायलटों ने नौसेना के साथ बुनियादी उड़ान प्रशिक्षण हासिल किया उसके बाद भारतीय वायु सेना के साथ डीओएफटी पाठ्यक्रम में शामिल हुईं। अब इन महिला पायलटों को पोरबंदर, गोवा और विशाखापट्टनम में नौसेना के हवाई जत्थों में नियुक्त किया गया है।
शिवांगी भी रच चुकी हैं इतिहास
वाराणसी की रहनेवाली फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह दुनिया की सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक राफेल की पहली महिला पायलट बन चुकी हैं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह पहले मिग-21 लड़ाकू विमान को उड़ाया। इसके बाद वायुसेना के अंबाला बेस पर वह 'कन्वर्जन ट्रेनिंग' ले रही हैं। इसके पूरा होते ही वायुसेना के अंबाला बेस पर 17 'गोल्डन एरोज' स्क्वाड्रन में औपचारिक रूप से एंट्री ले लेंगी।
नौसेना की पहली महिला पायलट थीं शुभांगी स्वरूप
शुभांगी स्वरूप भारतीय नौसेना की पहली महिला पायलट थीं। इन्होंने हैदराबाद के निकट डिंडिगुल वायु सेना अकादमी में पायलट के प्रशिक्षण लिया। शुभांगी ने वर्ष 2010 में डीएवी स्कूल से दसवीं की पढ़ाई की और विज्ञान विषय के साथ 12वीं करने के बाद इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। बीटेक के बाद एमटेक में प्रवेश के समय इन्होंने एसएसबी की परीक्षा पास करके वह अपने सपने को साकार करने के रास्ते पर आगे बढ़ गईं। तायक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक विजेता रहीं हैं। शाहजहांपुर के तिलहर कस्बे के कुवंरगंज मोहल्ला निवासी रिटायर पोस्टमास्टर रमेश चंद्र गुप्ता के बेटे ज्ञानस्वरूप भनेवी में कमांडर हैं। ज्ञानस्वरूप की बेटी हैं शुभांगी। शुभांगी की इस कामयाबी पर दादा रमेश चंद्र गुप्ता, दादी निर्मला देवी, ताऊ सत्य स्वरूप, मां कल्पना स्वरूप और पिता ज्ञानस्वरूप खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं।
Published on:
23 Oct 2020 05:13 pm

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