
लखनऊ विश्वविद्यालय में हुई फीस वृद्धि के खिलाफ आइसा (ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन) ने अन्य छात्र संगठनों के साथ मिलकर प्रतिरोध मार्च निकालते हुए कुलपति ऑफिस के सामने विरोध प्रदर्शन किया। सभी ने एक स्वर में फीस वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाने और केंद सरकार द्वारा तानाशाही तरीके से थोपी गई नई शिक्षा नीति 2020 को रद्द करने की मांग की।
विवि द्वारा इस सत्र से MA कोर्स में ली जाने वाली फीस में 1,000 रुपये का इजाफ़ा किया गया। यह फीस प्रैक्टिकल फीस के नाम पर छात्रों से ली जा रही है जबकि सामाजिक शास्त्र के विषयों में प्रयोगशाला का कोई प्रावधान ही नहीं है। जब इस मुद्दे को लेकर छात्र संगठनों का प्रतिनिधि मंडल विवि प्रशासन से बात करने पहुंचा, तो प्रशासन के पास इसका कोई जवाब या तर्क नहीं था।
छात्र संगठनों ने नई शिक्षा नीति को बताया छात्र विरोधी
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत विश्वविद्यालयों की सार्वजनिक वित्त पोषित शिक्षा को ऋण आधारित शिक्षा में बदलने की केंद्र सरकार की यह कथित कॉर्पोरेटवाद वाले कदम को छात्र एकदम बर्दाश्त नहीं कर रहे हैं। इसमें विवि अगर अपने खर्च को ज्यादा से ज्यादा दिखा सकते हैं तो वे लोन के लिए योग्य होंगे।
इस क्रम में JNU, AMU जैसे विश्वविद्यालयों ने 500 करोड़ का लोन लिया है। जिसे चुकाने के लिए आम छात्रों की फीस में लगातार बढ़ोत्तरी की जा रही है। छात्रों का आरोप है कि सार्वजनिक शिक्षा को निजी शिक्षा में तबदील किया जा रहा है जिसे बस कुछ पैसे वाले हासिल कर सकते हैं।
विरोध कर रहे इन छात्र संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा थोपी गई नई शिक्षा नीति इस देश की सार्वजनिक शिक्षा को व्यवसायीकरण और बाजारीकरण की दिशा में ढकेलने का एक कॉर्पोरेट परस्त दस्तावेज है जिसका विरोध उनके अनुसार हर विश्वविद्यालय के छात्र कर रहे हैं।
Updated on:
04 Nov 2022 09:23 pm
Published on:
04 Nov 2022 09:16 pm
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