
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मध्यप्रदेश चुनाव को लेकर खूब विवाद हुआ, पर अब ये विवाद सार्वजनिक तौर पर थम गया है। लेकिन अभी भी दोनों दलों के बीच फ्रेंडली फाइट जारी है। अब इसी कड़ी में सपा के कार्यालय के बाहर लगा एक बैनर चर्चा का विषय बन गया है। इस बैनर में अखिलेश यादव को देश का भावी प्रधानमंत्री बताया गया है। हालांकि, इस पर अखिलेश यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि पोस्टर लगने से कोई कुछ नहीं बनता। समाजवादियों का ये लक्ष्य है कि भारतीय जनता पार्टी को रोका जाए।
इससे पहले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीट के बंटवारे को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच मनमुटाव हुआ। बताया जा रहा है कि इसी वजह से सपा कार्यालय के बाहर लगा पोस्टर चर्चा का विषय बना हुआ है। सपा और कांग्रेस का विवाद तो यहां तक हो गया कि अखिलेश यादव ने कांग्रेस-बीजेपी में सांठगांठ तक के आरोप लगाये थे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कांग्रेस-सपा में विवाद की शुरुआत कैसे हुई? सपा की तरफ से क्या बयान दिए गए? कांग्रेस के नेताओं ने क्या पलटवार किया? क्या इस विवाद की आंच इंडिया गठबंधन तक जाएगी? चलिए जानते हैं…
कांग्रेस-सपा में विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
दरअसल विवाद की शुरुआत सपा और कांग्रेस के बीच मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर हुई। सपा को छह सीटें देने के बारे में बातचीत इंडिया गठबंधन के मंच से शुरू हुई थी। लेकिन कांग्रेस ने आमला सीट को छोड़कर बाकी सभी 229 सीटों पर अपने उम्मीदवार तय कर दिए। इस सूची में वो सीटें भी थीं जिनको लेकर कांग्रेस और सपा में गठबंधन की चर्चा हुई थी। यही विवाद की असली वजह बनी।
यहां से ही बयानबाजी का सिलसिला शुरू होता है। एक तरफ अखिलेश यादव ने कहा की कांग्रेस ने सपा को धोखा दिया और अजय राय ने कहा घोसी में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया। इसी बात पर सपा और कांग्रेस में बयानबाजी चल रही थी और अखिलेश यादव ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बयान का जवाब देते-देते उन्हें चिरकुट कह दिया।
दोबारा अखिलेश के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अजय राय ने कहा, “जो लोग अपने पिता का सम्मान नहीं कर पाए, उनसे बेहतर भाषा की क्या उम्मीद की जाए?” MP में कांग्रेस और सपा के बीच टिकटों का बंटवारा नहीं होने से दोनों ही पार्टियों में खटास बढ़ती ही गई। इसी बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की एंट्री हुई और उन्होंने अखिलेश यादव को ‘अखिलेश-वखिलेश’ कह दिया। सपा अध्यक्ष पर पूर्व सीएम कमलनाथ समेत कांग्रेस नेताओं के बयानों पर सपा सांसद रामगोपाल यादव ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “हमें इनपर कुछ नहीं कहना है, ये छुटभइये नेता हैं।”
INDIA पर पड़ेगा इस बयानबाजी का असर?
बयानबाजी का सिलसिला रुकने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। और इससे सीधा सवाल इंडिया गठबंधन की एकता पर हो रहा है। वहीं अब अखिलेश यादव का इंडिया गठबंधन को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, “इंडिया गठबंधन अब मुझे पता लगा है मध्य प्रदेश चुनाव के बाद। भारत के चुनाव के लिए है, इंडिया के चुनाव के लिए है, तो जब देश का चुनाव आएगा तब बात होगी। लेकिन यह सवाल क्रेडिबिलिटी का है। BJP बहुत बड़ी पार्टी है, BJP बहुत आर्गनाइज्ड पार्टी है, इसलिए उससे मुकाबले के लिए कोई भी कंफ्यूजन किसी भी दल को नहीं होना चाहिए।”
इसी क्रम में AIMIM के प्रदेश प्रवक्ता मोहम्मद फरहान ने भी कुछ ऐसा कहा है जिससे ये तय करना मुश्किल है कि आगे इंडिया गठबंधन का फ्यूचर क्या होगा। उन्होंने कहा है, “अखिलेश यादव के चेहरे से सेक्युलरिज्म का नकाब उतर गया है। अखिलेश यादव पूरी तरह से बीजेपी के दबाव में काम कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें अब ईडी और सीबीआई का डर सता रहा है।”
Updated on:
23 Oct 2023 09:13 pm
Published on:
23 Oct 2023 09:02 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
