
लखनऊ. शासन ने उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद का गठन करने का ऐलान किया है। करीब 16 साल बाद परिषद का पुनर्गठन होगा। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा संजय अग्रवाल ने मंगलवार को इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी। इसके लिए निदेशक माध्यमिक शिक्षा को परिषद् का अध्यक्ष बनाया होगा। वहीं लखनऊ में होगा परिषद् का मुख्यालय, संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए परिषद् का गठन किया गया है। इसमें अध्यक्ष समेत 28 सदस्य परिषद में शामिल होंगे।
बदहाल था परिषद अब नई जान आएगी
संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए लगभघ डेढ़ दशक पहले यूपी बोर्ड के तर्ज पर संस्कृत बोर्ड का गठन किया गया था लेकिन उत्तर प्रदेश संस्कृत शिक्षा बोर्ड आज भी केवल कहने के लिए बोर्ड के नाम पर संचालित हो रहा हैं। आलम यह है कि यहां तक की परिषद से सम्बद्ध संस्कृत विद्यालयों का हाल भी काफी बुरा हैं। इनका कहीं कोई ऑनलाइन रिकॉर्ड तक नहीं मौजूद है। यहीं नहीं परिषद के कई एडेड स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपने भवन और शिक्षक तक नहीं मिले हैं। ऐसे में कई लोगों ने तो इस बोर्ड के अस्तिव पर ही सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
सम्पूर्णानंद से अलग हटकर बना था परिषद
दरअसल साल 2000 में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से अलग होकर उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की स्थापना की गई थी। संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए कॉलेजों को अनुदान सूची पर लिया गया। साथ ही निजी स्कूलों को भी इस परिषद के माध्यम से मान्यता देने की शुरुआत की गई। इस समय केवल लखनऊ मंडल में ही 48 सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालय संचालित हैं, जबकि 17 प्राइवेट कॉलेजों को भी मान्यता दी गई है। लेकिन इन स्कूलों की सूची खुद ज्वाइंट डायरेक्टर के पास भी नहीं मौजूद है।
ऑनलाइन ब्यौरा तक मौजूद नहीं था
सिर्फ इतना ही नहीं, परिषद से जुड़ी कोई भी सूचना ऑनलाइन नहीं है। यदि किसी को संस्कृत से जुड़े स्कूल, अधिकारी या मान्यता आदि के संबंध में कोई जानकारी लेनी है तो उसे परिषद के कार्यालय ही आना पड़ेगा। वेबसाइट न होने की वजह से लोगों को जानकारी लेने में काफी दिक्कतें होती हैं।
Published on:
05 Dec 2017 07:21 pm

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