
Mahashivratri
Mahashivratri 2024: ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में महाशिवरात्रि के मध्य रात्रि में भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसलिए इस दिन को महाशिवरात्रि या कालरात्रि भी कहा जाता है। देवों के देव महादेव भगवान शंकर के इस व्रत का विशेष महत्व है। ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को आधी रात्रि के समय करोड़ों सूर्य के तेज के समान ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ था। स्कंद पुराण के अनुसार चाहे समुद्र सूख जाए। हिमालय पर्वत टूट जाए। शिखर विचलित हो जाएं परंतु भगवान शिव का व्रत कभी बेकार नहीं जाता। प्रभु श्री राम भी यह व्रत रख चुके हैं।
महाशिवरात्रि के दिन काले तिलों सहित स्नान करके। व्रत रख कर रात में भगवान शिव शंकर की विधिवत आराधना करना कल्याणकारी और फलदायी माना जाता है। अगले दिन अर्थात अमावस के दिन मिष्ठान और अन्य भेंट सहित ब्राह्मणों तथा शारीरिक रूप से असमर्थ व असहाय लोगों को भोजन देने के बाद ही खुद भोजन करना चाहिए। यह व्रत बहुत ही कल्याणकारी होता है। और इससे अश्वमेध यज्ञ के बराबर का फल प्राप्त होता है।
प्रात: काल स्नान करके। एक वेदी पर कलश की स्थापना कर गौरी और भगवान शिव शंकर की मूर्ति या चित्र रखें दे ।कलश को जल से भर कर रोरी, अक्षत, मौली पान-सुपारी, लौंग, इलायची, दूध, दही, घी, शहद, चंदन, कमल गट्टा, धतूरा, बिल्व पत्र, कनेर आदि भगवान को अर्पित करें और शिव की आरती पढ़ें। रात्रि जागरण में भोले शंकर की 4 आरतियों का विधान आवश्यक माना गया है। इस अवसर पर शिव पुराण का पाठ करना भी कल्याणकारी कहा जाता है।
Published on:
07 Mar 2024 03:30 pm
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