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नामकरण ‘ज़ख्म’ का ‘सारांश’ यह कहना ठीक नहीं: महेश भट्ट

साल 1999 में आई फिल्म 'ज़ख्म' के बारे में कहा जाता है इस फिल्म के जरिए महेश भट्ट ने अपने दिल के दर्द को बयां किया था। इस फिल्म को नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। अब फिर से भट्ठ साहब एक टेलीविजन सीरियल के जरिए अपना हाल-ए-दिल दर्शकों को दिखाने का प्रयास करने वाले हैं। स्टार प्लस पर रिलीज होने वाले 'नामकरण' उन्हीं का कॉन्सेप्ट है।

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Prashant Srivastava

Sep 09, 2016

mahesh

mahesh

लखनऊ.
साल 1999 में आई फिल्म 'ज़ख्म' के बारे में कहा जाता है इस फिल्म के जरिए महेश भट्ट ने अपने दिल के दर्द को बयां किया था। इस फिल्म को नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। अब फिर से भट्ठ साहब एक टेलीविजन सीरियल के जरिए अपना हाल-ए-दिल दर्शकों को दिखाने का प्रयास करने वाले हैं। स्टार प्लस पर रिलीज होने वाले 'नामकरण' उन्हीं का कॉन्सेप्ट है। इस सीरियल में एक मां-बेटी की कहानी है जिनके संघर्ष को महेश भट्ट छोटे पर्दे के जरिए दिखाएंगे। इस सीरियल के प्रमोशन के लिए राजधानी लखनऊ आए महेश भट्ट, बरखा बिष्ट और बाल कलाकार अश्वीन ने तमाम बातें शेयर कीं।


यह 'जख्म' से थोड़ा हटकर है


पिछले दिनों कुछ वेबसाइट्स ने दावा किया था कि सीरियल नामकरण की कहानी फिल्म जख्म से मिलती- जुलती है। इस पर महेश भट्ट का कहना है कि यह बात पूरी तरह से ठीक नहीं। इस सीरियल की कहानी अलग है। इसमें एक मां (बरखा बिष्ट) है जो अपनी बेटी को खुद से पालती है। पिता का होना न होना बराबर सा है। समाज उस मां का सपोर्ट नहीं करता लेकिन वो हार नहीं मानती। वहीं बेटी का किरदार भी काफी मजबूत है। एक तरह से कहें तो वह सीरियल की सेंटर ऑफ अट्रैक्शन है। बेटी का किरदार नौ साल की अश्वीन निभा रही हैं।




कहानी के बीच में आएंगे गाने


इस सीरियल की खास बात यह है कि इसमें हर अहम सीन के बाद गानें भी आएंगे जो कहानी से ही जुड़े होंगा। यह गानें आपको नब्बे के दशक में ले जाएंगे। इन गानों को अनुराधा पौडवाल और कुमार शानु ने गाया है। वहीं अनु मलिक ने कंपोज किया है। महेश भट्ट ने बताया कि नामकरण का टाइटल ट्रैक 'ऐ जिंदगी...' भी उनके दिल के काफी करीब है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने इस गाने के बोल भी पढ़कर सुनाए।


वहीं सीरियल में लीड रोल निभाने वाली बरखा से जब पूछा गया कि वह काफी दिनों बाद किसी सीरियल में नजर आ रही हैं तो उनका कहना था कि उन्हें ऐसी स्क्रिप्ट का बड़ी शिद्दत से इंतजार था।




एक रंग का नहीं हो सकता देश


राजनीतिक पार्टियों व तमाम मुद्दों को लेकर भी महेश भट्ट खुलकर बोलते हैं। उनसे जब पूछा गया कि क्या वह किसी पार्टी की ओर से आने वाले विधानसभा चुनाव में प्रचार करेंगे तो उन्होंने इससे साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि लोग मेरी विचारधारा से वाकिफ हैं लेकिन मैं किसी एक पॉलिटिकल पार्टी का खास नहीं हो सकता। राजनीति को लेकर मेरी सोच साफ है कि देश किसी एक रंग का नहीं हो सकता। उनका इशारा कहीं न कहीं भगवाकरण को लेकर था।

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