
Rajasthan budget 2026: मुख्यमंत्र भजनलाल शर्मा और वित्त मंत्री दिया कुमारी। फोटो पत्रिका
Rajasthan Budget 2026: जयपुर। राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार का बजट बुधवार को वित्त मंत्री दिया कुमारी पेश करेंगी। यह बजट ऐसे समय आ रहा है, जब राज्य में अगले दो महीनों में पंचायत और निकाय चुनाव कराना संवैधानिक मजबूरी है। ऐसे में बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि सीधे-सीधे चुनावी रणनीति का आइना बन गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय चुनावों से पहले सरकार का फोकस उन वर्गों पर रहेगा, जिनका सीधा संबंध पंचायत और निकायों से है।
ग्रामीण मतदाता, शहरी मध्यम वर्ग, महिलाएं, किसान और गरीब तबका। ऐसे में स्वाभाविक है कि इस बजट पर केवल आर्थिक नहीं, बल्कि गहरी सियासी निगाहें भी टिकी हैं। सवाल साफ है, क्या यह बजट लोकलुभावन घोषणाओं का दस्तावेज होगा या सरकार संरचनात्मक सुधारों का साहस दिखाएगी? कुल मिलाकर यह बजट केवल आंकड़ों का नहीं, पंचायत-निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक संदेश का दस्तावेज होगा।
यह बजट सरकार के सामने दोहरी चुनौती लेकर आया है। एक ओर जनता को तात्कालिक राहत देने वाली लोकलुभावन घोषणाएं हैं, दूसरी ओर वित्तीय अनुशासन और संरचनात्मक सुधार। चुनावी माहौल में वेलफेयर बजट का दबाव स्वाभाविक है, लेकिन भाजपा सरकार यह संदेश भी देना चाहेगी कि वह 'मुफ्त योजनाओं' की राजनीति तक सीमित नहीं है।
ग्रामीण इलाकों में सड़क, पानी, पंचायत भवन, जल जीवन मिशन और सिंचाई से जुड़े प्रावधानों की उम्मीद की जा रही है। शहरी निकायों के लिए सीवरेज, कचरा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट, ट्रांसपोर्ट और आवास योजनाएं फोकस में रह सकती हैं। साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा राहत जैसे कदम सीधे वोटर से जुड़ते हैं। सवाल यह है कि सरकार इन पर कितना खर्च बढ़ाती है और कहां ब्रेक लगाती है।
महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों को सस्ती फाइनेंसिंग, पोषण व स्वास्थ्य योजनाओं का विस्तार संभव है। किसानों के लिए सिंचाई परियोजनाएं, फसल बीमा और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस संकेत देता है कि ग्रामीण वोट बैंक को साधने की पूरी कोशिश होगी। शहरी गरीबों के लिए आवास और रोजगार से जुड़े प्रावधान निकाय चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
राजकोषीय घाटा सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है। यदि बजट में अनुत्पादक सब्सिडी कम करने या खर्च पर नियंत्रण का संकेत आता है, तो यह रिफॉर्म बजट का मजबूत संदेश होगा। लेकिन चुनावी साल में ऐसा कदम राजनीतिक रूप से जोखिम भरा भी साबित हो सकता है।
भाजपा इस बजट को 'स्थानीय विकास और जिम्मेदार शासन' के नैरेटिव से जोड़ना चाहेगी। वहीं, विपक्ष इसे चुनावी बजट करार देते हुए अधूरी घोषणाओं और राहत की सीमाओं को मुद्दा बनाएगा। बजट तय करेगा कि सरकार पंचायत-निकाय चुनावों में जनता को राहत का भरोसा देती है या सुधार का विजन।
1- वीबी-जी-रामजी मॉडल- विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (वीबी-जी-रामजी) की तर्ज पर शहरी रोजगार, स्किल डवलपमेंट और आजीविका सृजन से जुड़ी योजनाओं को बढ़ावा संभव।
2- स्पॉन्ज सिटी मॉडल- स्पांज सिटी की तर्ज पर डवलपमेंट। इस मॉडल में शहरभर में पोरस (छिद्रदार) संरचनाओं (जैसे पोरस सड़कें, फुटपाथ, पार्क और ड्रेनेज) का निर्माण किया जाता है। स्पॉन्ज की तरह ये संरचनाएं बारिश के पानी को सोखकर जमीन के भीतर पहुंचाती हैं, जिससे सतही जलभराव कम होता है और भूजल स्तर में सुधार होता है।
3- म्यूनिसिपल बॉन्ड- केन्द्र सरकार के मौजूदा बजट की तर्ज और मंशा अनुरूप नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए प्रदेश में चुनिंदा निकायों में ट्रायल आधार पर म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने की संभावना।
4- जयपुर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस- जयपुर शहर के लिए 1300-1500 करोड़ रुपए का संभावित इन्फ्रा बजट। सीकर रोड पर एलीवेटेड रोड, अजमेर रोड पर अंडरपास, मास्टर ड्रेनेज प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर।
1- ग्राम पंचायत (फरवरी में संभावित है चुनाव)
-14403 ग्राम पंचायत हैं
-130282 हैं प्रस्तावित वार्ड
-457 हैं पंचायत समिति
-41 जिला प्रमुख चुने जाने हैं
2- नगरीय निकाय (मार्च में संभावित है चुनाव)
-309 नगरीय निकायों में चुनी जानी है शहरी सरकारें
-10245 पार्षद चुने जाने हैं
-116 नगरीय निकाय नए गठन किए गए हैं
Published on:
11 Feb 2026 06:40 am
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