
फंस गया सपा-बसपा का गठबंधन, मायावती ने रख दी ऐसी शर्त, अखिलेश की बढ़ गई टेंशन
लखवऊ. तीन लोकसभा उपचुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा और रालोद को समर्थन देकर उन्हें जीत दिलाई। इसी के बाद से 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में गठबंधन के और मजबूत होने के कयास लगाए जाने लगे हैं। लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर मायावती ने अक बार फिर से मास्टर स्ट्रोक चल दिया है। जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव बसपा को 34 तो सपा को 31 और अन्य दलों को बाकी सीटें देना चाहते हैं। पर बसपा ने 80 में 40 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का संकेत दिया है। इसी के बाद लखनऊ की सियासत फिर से गर्मा गई है। कैराना उपचुनाव चुनाव के बाद मायावती की तरफ से फिलहाल गठबंधन को लेकर कोई बयान नहीं आया और वह अभी खामोश हैं। वहीं मायावती की ये खामोशी कहीं न कहीं बीजेपी के लिए राहत भरी खबर साबित हो सकती है। क्योंकि अगर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सपा-बसपा का गठबंधन टूटा तो इससे बीजेपी को बड़ा फायदा मिलेगा।
इस फार्मूले के तहत चुनाव लड़ना चाहती है सपा
गोरखपुर-फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा को समर्थन देकर मायातवी ने वहां पर साइकिल दौड़ा दी थी। इसी के बाद दोनों दलों के प्रमुखों ने गठबंधन का ऐलान कर दिया। कैराना उपचुनाव में गठबंधन समर्थित राष्ट्रीय लोकदल की उम्मीदवार की जीत हुई, पर बसपा सुप्रीमो ने इस खुशी से दूरी बना ली और उनकी तरफ से कोई बयान नहीं आया। पार्टी सूत्रों की मानें तो मायावती ने अखिलेश यादव से साफ कह दिया है कि बसपा उत्तर प्रदेश की 80 में 40 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और बची सीटें सपा को देगी। पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस फार्मूले पर सहमति नहीं होते दिख रहे। अखिलेश बसपा को 34 तो कांग्रेस को 8 से 10 के अलावा अन्य मित्र दलों को सीटें देने चाहता हैं।
बसपाई अभी भी सपा से बनाए हैं दूरी
गठबंधन के ऐलान के बाद बसपा कार्यकर्ता अभी भी सपाईयों से दोस्ती के बजाए दूरी बनाए हुए हैं। कैराना लोकसभा चुनाव में मिली जीत के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्न मनाया था और अखिलेश यादव ने प्रेस के जरिए जीत की बधाई प्रदेश की जनता को दी थी, लेकिन मायावती खामोश रहने के साथ ही उनके दल के कार्यकर्ता जश्न में शामिल नहीं हुए। हाल ही में पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हुए मायावती ने कहा था कि यदि गठबंधन में सम्मानजनक सीटें न मिली तो कार्यकर्ता अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहें। बसपा के एक कद्दावर नेता ने बताया कि अगर पार्टी को 40 सीटें नहीं मिली तो हम अकेले चुनाव में जा सकते हैं।
पदाधिकारियों ने मायावती को दिया सुझाव
हाल ही में हुए उपचुनावों में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के दलित वोटर्स ने बड़ी भूमिका निभाई थी, ऐसे में मायावती चाहती हैं कि यूपी लोकसभा की 80 सीटों में 40 सीटें उनकी पार्टी के लिए छोड़ी जाएं। सूत्रों की मानें तो मायातवी ने अपने पदाधिकारियों के साथ एक बैठक की और उसने सीटों के बटंवारे को लेकर चर्चा की। कई बड़े नेताओं ने उन्हें बताया कि अगर पार्टी को 40 से कम सीटें मिलती हैं तो कैडर पर इसका प्रभाव पड़ेगा। साथ ही चुनाव के वक्त जिसे टिकट नहीं मिला, वह पार्टी छोड़ कर भाजपा के साथ जा सकता है। बीते हफ्ते मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए साफ कहा था कि अगर बीएसपी को पर्याप्त सीटें नहीं मिलीं तो हम अकेले भी चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि सीटों के बंटवारे के मामले में समाजवादी पार्टी किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहती।
इसके चलते मांगी आधी सीटें
बीएसपी का ज्यादा सीटों की मांग पर तर्क है कि महागठबंधन के जितने भी संभावित पार्टनर हैं उनमें से उसकी पार्टी के वोट ज्यादा अच्छे तरीके से किसी भी गठबंधन के दल को ट्रांसफर हो सकते हैं। हालांकि एसपी की भी यादव वोटर्स के साथ मुस्लिम मतदाताओं पर मजबूत पकड़ मानी जाती है लेकिन राजनीति घराने में इस बात को लेकर आशंका जताई जा रही है कि अखिलेश अपने वोटर्स को दूसरे दलों को ट्रांसफर करवा सकते हैं या नहीं। पार्टी सूत्रों ने कहा कि बीएसपी कुल सीटों में करीब आधे की मांग कर सकती है। यह मांग पार्टी के वोट शेयर और 2014 में दूसरे स्थान पर आने वाली सीटों के आधार पर है। सूत्रों के मुताबिक हर विधानसभा सीटों पर बीएसपी आसानी से कम से कम 5000 वोट अपने सहयोगी दल को ट्रांसफर करा सकती है।
Updated on:
03 Jun 2018 12:36 pm
Published on:
03 Jun 2018 12:28 pm

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