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लखनऊ। जहां एक ओर कांग्रेस प्रदेश में अपनी जड़ें मजबूत करते हुए डैमेज कंट्रोल करने में जुटी है तो दूसरी ओर भाजपा उसके गढ़ में सेंध लगाने के प्रयास में है। यही कारण है कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के अमेठी - रायबरेली दौरे के ठीक बाद अमित शाह भी अमेठी पहुँच गए। दूसरी ओर सपा - बसपा का संभावित गठबंधन कांग्रेस को संजीवनी देने के प्रयास कर रहा है। सपा ने अमेठी में 2004 और रैबरेली में पार्टी जानकारों के अनुसार समाजवादी पार्टी के बाद अब बसपा भी अमेठी और रायबरेली से अपना कैंडिडेट न उतार कर अपना समर्थन कांग्रेस को देने की तैयारी में है। जाहिर है ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव इन दोनों सीटों पर काफी दिलचस्प होंगे।
सोनिया गांधी और राहुल गांधी का अमेठी रायबरेली द्वारा यही संकेत देता है कि कांग्रेस अपने गढ़ को बचाने के लिए कितने संजीदा है। वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कांग्रेस को कमजोर करने के लिए रणनीति बना चुके हैं। बसपा और सपा दोनों ही पार्टियां कांग्रेस उम्मीदवार के लिए संजीवनी साबित हो सकते हैं। सूत्रों की माने तो बसपा सुप्रीमो इस बात पर हामी भर सकती हैं कि वह अमेठी और रायबरेली से कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी। संयुक्त विपक्ष की यह नई नीति कितनी कारगर साबित होगी यह तो 2019 के निर्णय बताएंगे लेकिन इतिहास पर नजर डालें तो आंकड़ा विपक्ष के पक्ष में ही जाता है।
'डराते' हैं अमेठी सीट के आंकड़े
अमेठी सीट के 2014 लोकसभा के आंकड़े देखें तो वहाँ कांग्रेस भाजपा से लगभग 1 लाख मतों से पीछे है। फिलहाल राहुल गाँधी वहाँ से वहां से सांसद हैं। उन्होंने स्मृति ईरानी को मात दी थी। कांग्रेस को 46.71 प्रतिशत वोट मिले और भाजपा को 34.38 प्रतिशत। कांग्रेस के लिए ये सीट चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि जीत के बावजूद कांग्रेस के वोट बैंक में 25 प्रतिशत की गिरावट दिखी है और भाजपा के वोट बैंक में 28 प्रतिशत बढ़ौतरी रही। बसपा को 6.60 प्रतिशत वोट मिले थे।
क्या कहते हैं रायबरेली सीट के आंकड़े
रायबरेली से सोनिया गांधी ने 2014 में 3.5 लाख मतों से जीत हासिल की थी। लेकिन यहां भी 2009 के मुकाबले वोट प्रतिशत में 8 प्रतिशत की गिरावट थी जबकि भाजपा का वोट प्रतिशत 17.23 प्रतिशत बढ़ कर कुल वोटों का 21 प्रतिशत हुआ। बसपा को यहां 7.71 प्रतिशत वोट मिले थे।
बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ऐसा करने से पार्टी की मंशा होगी कि अपना वोट बैंक पर कांग्रेस को दें। समाजवादी पार्टी ने पिछले चुनाव में कैंडिडेट नहीं उतारा था ऐसे में उनका वोट बैंक बटा। बसपा सपा और कांग्रेस के साथ आने से चुनाव में भाजपा को झटका लगेगा।
Published on:
21 Apr 2018 01:19 pm
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