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चॉकलेट की लालच देकर रखते थे बुरी नीयत

#MeToo हैशटैग के बहाने यौन शोषण से जुड़े मामलों पर लड़कियां व महिलाएं खुल कर आवाज उठा रही हैं।

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#Metoo पर विशेष

लखनऊ. सोशल मीडिया पर हैशटैग 'मी टू' ट्रेंड में है। इस हैशटैग के जरिए यौन शोषण से जुड़े मामलों पर महिलाएं खुल कर आवाज उठा रही हैं। केवल सोशल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि गली-मोहल्ले में भी इस कैंपेन की चर्चा है। आज हम आपको एक ऐसी स्टोरी बता रहे हैं जिसने जीजा-साली के रिश्ते को तार-तार कर दिया। खुर्रम नगर में रहने वाली दिव्या सिंह ने अपनी कहानी हमसे साझा की।

खुर्रम नगर में रहने वाली 17 साल की दिव्या सिंह (बदला हुआ नाम) एक साल से एक एनजीओ से रिहैब्लिटेशन के दौर से गुजर रही हैं। दिव्या ने बताया कि वह तब बहुत छोटी थीं, जब उनके इलाके में एक अधेड़ व्यक्ति ने कई बार दिव्या के साथ बदतमीजी भी की थी। इसकी शिकायत जब दिव्या ने घर पर की तो किसी तरह मामले को रफा-दफा किया गया। एक एनजीओ की इंचार्ज विनीता बताती हैं कि जब दिव्या को हमने रेस्क्यू किया था तो रोजाना करीब 8 से 10 अलग-अलग मर्द उसकी मासूमियत का कत्ल करते थे। उस फूल जैसी बच्ची को अपनी घिनौनी मंशाओं तले कुचलते थे। दिव्या की ज़िंदगी नर्क बना दी थी। उसकी मासूमियत के साथ उसके सपनों का भी दम घुट गया था। दिव्या को छुड़ाकर जब वापस उसके घर भेजा गया तो घरवालों ने अपनाने से इनकार कर दिया। तब से दिव्या शेल्टर होम को ही अपना घर मानती हैं।

दिव्या को धंधे में धकेलने वाले जीजा और दिव्या की बहन को जेल की सजा हुई थी। दिव्या ने बताया कि इसकी शुरुआत उसके जीजा जी ने की थी। वह अपनी दीदी के यहां अक्सर जाया करती थी। उसकी दीदी जब किसी काम से बाहर जाती थीं तो उसके जीजा जी चॉकलेट खिलाने के बहाने अपने कमरे में बुलाया करते थे। तब दिव्या की उम्र 12 साल थी। कई बार दिव्या को बैड टच किया गया। दिव्या के मना करने के बावजूद वे नहीं मानते थे। दिव्या उस पल को याद करती हैं तो आंखों में आंसू आ जाते हैं।

किसी तरह दिव्या उस दौर से निकलींं। अब वे खुद को एक मजबूत लड़की मानती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में जो गलतियां की हैं उनका उन्हें बहुत अफसोस है, लेकिन अब वह बुरे दौर को भुलाकर आगे बढ़ना चाहती हैं।

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