
लखनऊ. कहते हैं कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। राजधानी के मोहनलालगंज इलाके के पूर्व माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक राधेकांत चतुर्वेदी ने भी अपनी कोशिशों से स्कूल के हालात बदल दिए हैं। राधेकांत चतुर्वेदी ने वेस्ट मैटेरियल के जरिए विज्ञान के कई मॉडल तैयार किए हैं जिससे वह छात्रों को पढ़ाते हैं। इसमें ब्लड सर्कुलेशन, पाचन क्रिया आदि के मॉडल शामिल हैं। इसके अलावा जीरो बजट लैब भी बनाया है जिसमें बच्चों को तोल-भाव आसानी से सिखाया जाता है।
राधेकांत ने साझा किए अपने अनुभव
राधेकांत के मुताबिक, जब मैंने स्कूल जॉइन किया तो देखा स्टूडेंट्स का पढ़ाई में काफी कम दिलचस्पी है तो मैंने सोचा कि क्यों न पढ़ाई का तरीका बदला जाए। उनके मुताबिक जब मैंने बच्चों को हृदय व रक्त संचार के बारे में पढ़ाना शुरू किया तो बच्चे सुन तो रहे थे लेकिन समझ नहीं पा रहे थे फिर मैंने तय किया कि बच्चों को क्रियाशील मॉडल बनाकर और दिखाकर और सरल करूंगा।
ये प्रयोग किए
-कड़ी पॉलीथीन को हृदय जैसा आकार दिया।
-खाली पेन की नली बनाकर फूंक मारकर बच्चों को दिल की धड़कन दिखाई थी।
-सभी बच्चों व शिक्षकों को बता दिया था कि यह मॉडल जो तैयार हो रहा है केवल धड़कता दिल ही नहीं होगा बल्कि खून की नलियों में बहता खून भी दिखेगा। उनके मुताबिक, इसके लिए उन्होंने बच्चों द्वारा लाई गई टॉफी की खाली पन्नी, प्लास्टिक की मोटी व पतली नलिकाएं, कैंची, फेविकॉल, लाल ऊन, लाल रंग पुरानी सिरिंज व सेलो टेप का उपयोग किया।
इस इनोवेशन का यह प्रभाव हुआ कि स्कूल में स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ गई। इसके अलावा स्टूडेंट्स में मॉडल के माध्यम से विषय को प्रस्तुत करने का छिपा हुआ गुण भी सामने आ गया। शिक्षक राधेकांत के मुताबिक, हमारे विद्यालय में लगातार सकारात्मक ऊर्ज बढ़ी है। शिक्षकों के बीच भी नया करने की होड़ बढ़ी है। क्षेत्र के कई विद्यालयों में भी यह इनोवेशन का प्रयोग किया गया है।
Updated on:
05 Sept 2017 12:16 pm
Published on:
28 Aug 2017 06:36 pm
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