29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जहरीला पानी पीने से मरीं एक दर्जन से अधिक भैंसें, जो बचीं वे हो गईं अंधी

- फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी को पीने से मरीं एक दर्जन से अधिक भैंसें - दो दर्जन से अधिक भैंसें हुईं बीमारी - ग्रामीणों का आरोप, पहले भी लिए थे सैंपल मगर नहीं किए सुरक्षा के कोई इंतजाम

3 min read
Google source verification
जहरीला पानी पीने से मरीं एक दर्जन से अधिक भैंसें, जो बचीं वे हो गईं अंधी

जहरीला पानी पीने से मरीं एक दर्जन से अधिक भैंसें, जो बचीं वे हो गईं अंधी

लखनऊ. चिनहट के देवा रोड स्थित फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल युक्त जहरील पानी (Poisonous Water) पुरवा गांव के मवेशियों के लिए काल बन गया। नाले का पानी पीकर करीब 30 भैंसें मर गईं और लगभग दो दर्जन भैंसे बीमार पड़ गईं। मवेशियों का यह हाल देख पूरे गांव में कोहराम मच गया। ग्रामीण अपने-अपने मवेशियों को ढूंढने और बचाने में जुट गए। इस बीच नाले में उतरे दो युवक भी जहरीले पानी की गंध से बेहोश हो गए। उन दोनों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

गांव के पशुपालक रोजाना की तरह अपनी भैंसों को चरा रहे थे। इस दौरान भैंसें चरते-चरते नाले में चली गईं। कुछ भैंसे नाले से निकल ही नहीं पाईं, तो कुछ झाड़ियों में ही फस कर ढेर हो गईं। कुछ थोड़ी दूर आगे बढ़ीं और फिर गिर पड़ीं। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण अपने-अपने मवेशियों को बचाने में जुट गए। गांव वालों के मुताबिक, दस पहले भी इस तरह की घटना हुई थी। तब प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली थी।

पोस्टमार्टम पर ग्रामीणों का विरोध

प्रशासन की टीम ने जेसीबी मंगवाई और मवेशियों के पोस्टमार्टम करने की बात कही। पोस्टमार्टम के लिए मवेशियों को ट्राली में भरकर बक्शी का तालाब ले जाया गया, तो ग्रामीणों ने इस बात का विरोध किया। इसके बाद पशुचिकित्सकों की टीम को गांव में ही बुलाकर पोस्टमार्टम कराया गया।

जो बचीं वह अंधी हो गईं

नाले के जहरीले पानी से बाहर निकल कर जो भैंसें बच गईं, उनकी आंखों की रोशनी चली गई। ग्रामीणों को इस बात का पता तब चला, जब भैंसें चलते-चलते कहीं भी भिड़ जा रही थीं। पशु चिकित्सकों को दिखाकर इन भैंसों का इलाज कराया गया।

80 हजार की एक भैंस

गांव के रमाकांत यादव ने बताया कि उनकी 11 भैंसें और चार गाय थीं। इनमें पांच भैंसे मर चुकी हैं। उनकी एक-एक भैंस हजारों रुपये की थी। भैंसों के मर जाने से उनके धंधे पर असर पड़ा है। इसी तरह अभय यादव की भी आमदनी पर असर पड़ा है। उनकी भैंसें गांव में सबसे तगड़ी थीं। 80 हजार रुपये की एक भैंस थी। उनकी तीन में से दो भैंसों की मौत हो गई। यही हाल गांव के अन्य ग्रामीणों का रहा। गांव के जगमोहन की दो में से एक भैंस खत्म हो गई और एक मिली ही नहीं। दीपक कुमार की तीन भैंस थी जिनमें दो मर गईं। पवन रावत की नौ भैंसों में से सात मर गईं। राजकुमार की तीन भैंसें मरीं।

एक महीने पहले भेजा था सैंपल

मौके पर पहुंची पाल्युशन कंट्रोल बोर्ड (Pollution Control Board) की टीम ने नाले के पानी का नमूना लिया। गांव वालों का आरोप है कि इंडस्ट्रीयल एरिया में एक पेस्टीसाइड कंपनी है, जिसने नाले में जहरीला पानी छोड़ा। वहीं, एक महीने पहले भी नाले के पानी के जांच के लिए टीम आई थी। सैंपल भी भेजा गया था लेकिन उसके बाद भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई। सुरक्षा के इंतजाम भी नहीं किए गए।

ये भी पढ़ें:बच्चा चोरी मामले में 106 की हुई गिरफ्तारी, अफवाह फैलाने वालों पर लगेगी रासुका

Story Loader