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10 साल दौड़ी मां फिर मिल गया मृत सैनिक बेटे को न्याय

2002 में सेना में कमीशन प्राप्त शहीद कैप्टन विवेक आनंद सिंह पर हथियारों की अवैध खरीद फरोख्त का आरोप था

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लखनऊ

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Anil Ankur

Jan 23, 2018

arresting of criminals in jhansi

mother get justice after ten years of death of her solder son

लखनऊ। अपने मृत सैनिक बेटे को न्याय दिलाने के लिए एक मां को दस साल तक दौडऩा पड़ा। अंत में उसे न्याय मिला। पिछले दस साल से न्याय के लिए लड़ रही मां ने आखिरकार अपने मृत बेटे को सेना कोर्ट से न्याय दिला ही दिया। 2002 में सेना में कमीशन प्राप्त शहीद कैप्टन विवेक आनंद सिंह पर हथियारों की अवैध खरीद फरोख्त का आरोप था जिस पर दो बार सेना की ओर से जनरल कोर्ट मार्शल भी हुआ। इसे बाद में रद्द कर दिया गया, लेकिन दूसरे कोर्ट मार्शल के दौरान ही जवान की मौत हो गई थी।

अपने मृत बेटे को न्याय दिलाने की कसम खाने वाली मां दुर्गावती ने एफटी का दरवाजा खटखटाया था। सेना कोर्ट में सुनवाई के दौरान कैप्टन विवेक आनंद सिंह पर लगे आरोप सिद्ध नहीं हो पाए, साथ ही इसमें दूसरे बड़े अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई जिसके बाद सेना कोर्ट ने अन्य अधिकारियों पर जांच के आदेश दिए हैं। अब दूसरे अधिकारी अपने को बचाते घूम रहे हैं।

यह घटना 16 गढ़वाल रायफल्स बटालियन में तैनात कैप्टन विवेक आनंद सिंह 2007 में दिल्ली के कमांड हॉस्पिटल में अपने घुटने का ऑपरेशन करवाने के लिए भर्ती हुए। इस दौरान सेना का ही मेजर कयूम खान भी यहीं भर्ती था। मेजर पर अवैध तरीके से राजस्थान के व्यापारियों को पिस्टल बेचने का शक सेना को था। जिस कारण सैन्य अधिकारियों ने कमांड हॉस्पिटल पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान कैप्टन विवेक आनंद सिंह को मौके पर सैन्य अधिकारियों ने पाया और उन पर आरोप लगाया गया कि वह अवैध तरीके से हथियार व्यापारियों को बेच रहे थे।

सेना द्वारा लगाए गए इस आरोप के कारण कैप्टन के खिलाफ जनरल कोर्ट मार्शल हुआ जिसे बाद में रद कर दिया गया। इसी के बाद कैप्टन के खिलाफ दोबारा कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी बैठाई गई। दूसरी कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के दौरान ही संदिग्ध हालात में हुए एक सड़क हादसे में कैप्टन की मौत हो गई। इसके बाद बेटे को न्याय दिलान के लिए मां दुर्गावती ने आर्म्ड फोर्स ट्राइब्यूनल में मामला दाखिल किया।
एएफटी बार असोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी विजय कुमार पांडेय ने बताया कि सेना के बड़े अधिकारी को बचाने के लिए कैप्टन को गलत तरीके से फंसाया गया और दूसरे कोर्ट मार्शल के दौरान अचानक हुआ एक्सीडेंट भी संदिग्ध है। क्योंकि कोर्ट में आए मामले के दौरान न तो हथियार की खरीद के सुबूत पेश किए गए न ही एक्सीडेंट के दौरान चश्मदीद गवाह को कोर्ट के सामने लाया गया।