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गरीब महिला की कहानी सुन पसीजा अफसर का दिल और फिर पूरा ऑफिस जुटाने लगा चंदा

मदद भी ऐसी की घरों में चौैका बर्तन करके परिवार चलाने वाली जनक दुलारी की आंखों से खुशी के आंसू छलक गए।

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लखनऊ

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Dikshant Sharma

Dec 23, 2017

LMC

Lucknow Nagar Nigam

लखनऊ. निगम हो या कोई और सरकारी विभाग, बाबू से लेकर अधिकारियों पर आम तौर से पब्लिक को सताने के आरोप लगते रहते हैं। इसी धारणा को बदलते वाली मिसाल पेश की राजधानी के निगम कर्चारियों ने। मदद भी ऐसी की घरों में चौैका बर्तन करके परिवार चलाने वाली जनक दुलारी की आंखों से खुशी के आंसू छलक गए। जाते जाते वे बस इतना ही कह सकीं कि काश, हर कोई इसी तरह गरीबों की मदद के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाए।

क्या है मामला
चौक वार्ड के काली बाड़ी मंदिर के पीछे रहने वाली जनक दुलारी की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। वह दूसरों के घरों में कामकाज कर अपना घर चलाती हैं। अपने पति के देहांत होने के बाद उन्हें अपने और बेटों के नाम संपत्ति का हस्तांतरण कराना था। यही कार्य कराने वे पहुंची नगर निगम के ज़ोन 6 कार्यालय।दाखिल-खारिज का शुल्क करीब पांच हजार रुपये है। जनक कई दिनों से निगम कार्यालय जा रही थीं लेकिन उनके पास शुल्क जमा करने के लिए पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था नहीं हो सकी। इसके चलते वे पहले भी निराश होकर लौट चुकी थीं। इस बार उन्होंने जोनल अधिकारी डॉ. बिन्नो अब्बास रिजवी से मुलाकात की और उनके सामने अपनी आर्थिक स्थिति की तस्वीर बयां की।

ऑफिस में जमा किया गया चंदा
पूरा मामला जानने के बाद जोनल अधिकारी और अन्य निगम कर्मचारियों ने जनक दुलारी की अपने स्तर से मदद करने का फैसला लिया। जनक के पास 2500 हज़ार रूपए थे और अन्य 2500 के लिए निगम के जोनल ऑफिस में चंदा जोड़ा गया। जिसकी जितनी श्रद्धा हुई उतना दिया और अंतत: उनका दाखिल-खारिज शुल्क जमा कराया। शुल्क जमा कराने के बाद जनक दुलारी को प्रमाण पत्र भी दे दिया गया। प्रमाण पत्र मिलने के बाद जनक दुलारी अपने आंसू न रोक सकी और सभी को दुआएं दीं।


दो बार पहले लगा चुकी हैं चक्कर
जोनल अधिकारी ने बताया कि जनक दुलारी पहले भी ऑफिस आचुकी थी और उनके द्वारा शुल्क जमा करने के लिए रुपये पूरे न होने की बात भी कही गयी थी। पहले उनके पास 700 रुपये थे तो कभी 1500 इस बार जब वह आईं तो उनके पास 2500 रुपये थे। उन्होंने कहा कि अब इससे ज्यादा रुपये वह नहीं जुटा सकती हैं। उन्हें ऐसी स्थिति में देख कर हम सब ने मिलकर उनकी मदद की और दाखिल खारिज शुल्क जमा कराया।


बताते चलें कि पैरेंटल संपत्ति के हस्तांतरण के लिए दाखिल खारिज शुल्क जमा कराया जाता है। इसके लिए 5 हजार रुपये की राशि निर्धारित है। अन्य संपत्तियों के हस्तांतरण के मामले में रजिस्ट्री का एक प्रतिशत दाखिल खारिज शुल्क के रूप में जमा किया जाता है।