
ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को चलने फिरने लायक बनाएगा केजीएमयू, जल्द शुरू होगी न्यूरो रिहैबिलिटेशन यूनिट
लखनऊ. केजीएमयू में आने वाले ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को सिर्फ इलाज ही नहीं दिया जाएगा बल्कि इलाज के बाद उन्हें चलने फिरने लायक स्थिति में लाया जाएगा। इसके लिए लिंब सेंटर स्थित पीएमआर विभाग में रिहैबिलिटेशन यानी पुनर्वास की सुविधा दी जाएगी। इसकी शुरुआत नए साल में होने की उम्मीद है। केजीएमयू के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग में विभिन्न बीमारियों से जुड़े मरीजों को पुनर्वास की सुविधा दी जा रही है। यहां स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, सेरेब्रल पाल्सी, इंसेफेलाइटिस सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को रिहैबिलिटेशन दिया जा रहा है। इन बीमारियों में मरीज के अंग अकड़ जाते हैं। कई बार वे टेढ़े मेढ़े भी हो जाते हैं। दवा से इलाज के बाद उन्हें विभिन्न तरह के अभ्यास कराए जाते हैं। इससे वह चलने फिरने लायक बन जाते हैं। इसी तरह विभिन्न हादसों में घायल होने वालों में ब्लैडर बाउल मैनेजमेंट की जरूरत पड़ती है। ऐसे मरीजों में नर्स सिस्टम प्रभावित होने से पेशाब व दस्त अपने आप होने लगती है। इसे संबंधित व्यक्ति रोक नहीं पाता है। ऐसे में पुनर्वास के जरिए उन्हें रोकने का अभ्यास कराया जाता है। इसमें कुछ दवाओं के साथ ही एक्सरसाइज कराई जाती है। इससे मरीज ठीक होने लगते हैं।
क्या होता है रिहैबिलिटेशन
रिहैबिलिटेशन का अर्थ होता है पुनर्वास। इसके जरिए मरीज को फिर से पुरानी अवस्था में लाने का प्रयास किया जाता है। विभिन्न कारणों से चोटिल और बेजान हुए अंगों को फिर से सक्रिय करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। तरह तरह के अभ्यास कराए जाते हैं। कुछ दवाएं भी दी जाती हैं। मरीज को शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत बनाया जाता है।
पीएमआर विभाग कर रहा है तैयारी
लिंब सेंटर स्थित पीएमआर विभाग में पुनर्वास संबंधी सभी उपकरण हैं। अब यहां अलग से ऑक्सीजन पाइप लाइन भी बिछ गई है। ऐसे में यहां अलग से न्यूरो रिहैबिलिटेशन यूनिट तैयार की जा रही है। इसका फायदा यह होगा कि न्यूरोलॉजी विभाग व ट्रॉमा सेंटर से डिस्चार्ज होने वाले मरीजों को यहां कुछ समय तक रोका जा सकेगा। उन्हें रिहैबिलिटेशन देने के साथ ही उनके तीमारदारों को प्रशिक्षित कर दिया जाएगा जिससे संबंधित मरीजों का सही तरीके से रिहैबिलिटेशन हो सकेगा।
मरीजों के लिए इसलिए जरूरी है न्यूरॉरिहैबिलिटेशन
पीएमआर विभाग के डॉ राहुल भरत ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों का पहले दवाओं से इलाज होता है। फिर पुनर्वास की जरूरत पड़ती है। ब्रेन स्ट्रोक से कई बार शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं। कुछ लोग पूरी तरीके से पैरालिसिस का शिकार हो जाते हैं। न्यूरोलॉजी विभाग में भर्ती के दौरान मरीजों को कुछ अभ्यास कराए जाते हैं लेकिन यहां से डिस्चार्ज होने के बाद मरीजों का पुनर्वास नहीं हो पाता। वह भटकते रहते हैं। विभिन्न शोध रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि ब्रेन स्ट्रोक के मरीज का नियमित और सही पुनर्वास की सुविधा मिले तो रिकवरी दोगुनी गति से होती है। यह सुविधा लोहिया संस्थान सहित कई चिकित्सा संस्थानों में है। अब केजीएमयू भी इसे शुरू करने जा रहा है।
Published on:
30 Dec 2019 02:08 pm
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