
राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों की नियुक्तियों में विसंगति
पत्रिका एक्सक्लूसिव
दिनेश शाक्य
लखनऊ. वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 159 राजकीय महाविद्यालय हैं, जिनमें 42 स्नातकोत्तर (पीजी) महाविद्यालय हैं। 17 सितंबर को उच्चशिक्षा विभाग द्वारा 29 स्नातक प्राचार्यों को विभागी प्रोन्नति समिति की बैठक (डीपीसी) द्वारा स्नातकोत्तर (पीजी) प्राचार्य पर प्रोन्नति कर दी गयी थी, लेकिन तीन माह पश्चात उच्च शिक्षा विभाग दिनांक 27 दिसंबर को 29 प्राचार्यों में से मात्र 19 पीजी प्राचार्यों को ही नियुक्ति दे पाया है। 10 पीजी प्राचार्य अभी भी प्रतीक्षारत हैं। इसी तरह उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 17 अक्टूबर को राजकीय महाविद्यालयों के 70 प्राचार्य पदों पर डीपीसी की गयी थी, किन्तु अभी तक उन 70 स्नातक प्राचार्यों की नियुक्ति का अता-पता नहीं हैं। विसंगति से प्रभावित हो रहे लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर उपरोक्त जानकारी दी।
विसंगति से प्रभावित हो रहे लोगों ने पत्रिका को बताया कि 42 पीजी महाविद्यालयों में से राजधानी लखनऊ के तीन पीजी महाविद्यालयों में अक्टूबर 2017 से तीन रसूखदार महिला स्नातक प्राचार्य जमी हुईं हैं। अभी तक किसी भी पीजी प्राचार्य की नियुक्ति उच्च शिक्षा विभाग उन पीजी कॉलेजों में नहीं कर पाया है और न ही आगे भी संभावना है। इसके अतिरिक्त प्रतीक्षारत 10 पीजी प्राचार्य भी प्रभावशाली हैं, इसीलिए उनको अच्छे स्थान पर अथवा क्षेत्रीय कार्यालयों में उच्च शिक्षा विभाग नियुक्ति दिए हुए हैं। साथ ही साथ लगभग आधा दर्जन पीजी प्राचार्य अच्छे शहरों में स्थित स्नातक महाविद्यालयों में जमे हुए हैं। उन पर विभाग की नजर ही नहीं है।
उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो हाल ही में 19 पीजी प्राचार्यों की नियुक्ति में विसंगति स्पष्ट परलक्षित है, क्योंकि लखनऊ के तीन पीजी महाविद्यालय तथा ज्ञानपुर जैसे बड़े महाविद्यालय में पीजी प्राचार्यों की नियुक्ति नहीं कर के उनको दूरस्थ स्थानों पर 200 - 250 किलोमीटर दूर नियुक्ति प्रदान की गयी है। ऐसा इसलिये किया गया है क्योंकि इन अच्छे पीजी महाविद्यालयों में तैनात स्नातक प्राचार्य किसी न किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, मंत्री एवं न्यायाधीश के रिश्तेदार हैं। इसी तरह उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 17/10/2019 को राजकीय महाविद्यालयों के 70 प्राचार्य पदों पर डीपीसी की गयी थी, किन्तु अभी तक उन 70 स्नातक प्राचार्यों की नियुक्ति का अता-पता नहीं हैं।
Published on:
31 Dec 2019 04:08 pm
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