
बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया
यूपी सरकार ने प्रदेश के स्कूलों के लिए नया नियम लागू करने की तैयारी कर ली है, जिसके तहत अब किसी प्रिंसिपल या वरिष्ठ प्रवक्ता को सीधे तौर पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के पद पर तैनात नहीं किया जाएगा। इसी कड़ी में BSA के पद पर तैनाती करने से पहले ही सह जिला विद्यालय निरीक्षक, प्रधानाचार्य या वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर न्यूनतम तैनाती की अनिवार्यता के सम्बन्ध में शासन की ओर से नई कार्ययोजना बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद की अध्यक्षता में BSA प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने इस बावत पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। ये कमेटी 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करेगी।
15 दिनों में देनी होगी रपोर्ट
BSA के पद पर तैनाती देने से पहले ये कमेटी आधारभूत प्रशिक्षण देने और फील्ड स्तरीय अनुभव विकसित किए जाने पर जोर देगी। वहीं कमेटी BSA अधिकारी के पदों पर तैनाती से पहले पूर्व समूह-ख के अन्य विभिन्न पदों (वरिष्ठ प्रवक्ता, डावट/ प्रधानाचार्य सह जिला विद्यालय निरीक्षक/उप सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद एवं अन्य समकक्षीय पद) पर न्यूनतम तैनाती की अनिवार्यता के संबंध में कार्ययोजना तैयार करेगी और अपनी सिफारिशे 15 दिनों के भीतर शासन को प्रस्तुत करेगी। साथ ही कमेटी समूह-ख के सभी अधिकारियों को विभागीय नियमों, वित्तीय नियमों, आडिट नियमों, विधिक, शैक्षिक प्रबंधन इत्यादि का आधारभूत प्रशिक्षण दिए जाने पर भी सुझाव देगी।
कमेटी में ये अधिकारी शामिल
BSA की तरफ से बनाई गई इस कमेटी में महानिदेशक के अलावा पूर्व निदेशक डीबीशर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक भगवती सिंह, गणेश कुमार और उप निदेशक पीसी यादव को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। वहीं गठित समिति आवश्यतानुसार अपने स्तर से शैक्षिक सेवा के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों, शैक्षिक विशेषज्ञों से अभिमत प्राप्त कर सकेगी। समूह ख के 1449 पद हैं जिनमें बीएसए, एडीआईओएस, प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कॉलेज (बालक/बालिका) एवं वरिष्ठ प्रवक्ता (डायट) के पद हैं। इन अधिकारियों में से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी पद पर तैनाती की जाती है।
कार्ययोजना बनाने का ये कारण
गौरतलब है कि अक्सर ही अनुभवहीन अधिकारियों का सीधे तौर पर BSA के पद पर तैनाती हो जाने से हाईकोर्ट में ज्यादा से ज्यादा मुकदमेबाजी हो रही है। ऐसे में कई अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई होने और अनुशासनिक कार्रवाई खत्म होने के बाद दण्डात्मक कार्रवाई होने के चलते जिला विद्यालय निरीक्षक/समकक्ष पद पर पदोन्नति नहीं हो पाती है, जिसका नतीजा ये होता है कि अधिकतर पद रिक्त ही रह जाते हैं। ऐसे में बेसिक के साथ-साथ माध्यमिक शिक्षा विभाग के काम पर भी असर पड़ता है। इसी कारण शासन की तरफ से बेसिक शिक्षा विभाग को कार्ययोजना बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
Published on:
18 Oct 2022 10:25 am
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
