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सपा के संस्थापक सदस्य हैं बलराम यादव, जानिये इनके राजनीतिक कैरियर के बारे में

बलराम यादव सपा के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। आजमगढ़ निवासी बलराम यादव ने विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में अपनी मौजूदगी का एहसास विपक्षी दलों को बराबर कराया।

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Rohit Singh

Jun 27, 2016

balram yadav

balram yadav

लखनऊ।
पिछले दिनों मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के सपा में विलय को लेकर पैरवी करने के कारण सपा के वरिष्ठ नेता बलराम यादव को कैबिनेट पद से हाथ धोना पड़ा। जिसके बाद आज सपा सरकार के सांतवें मंत्रिमंडल विस्तार में दोबारा उन्हें कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। ऐसा सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के साथ उनके करीबी रिश्ते होने के चलते संभव हो पाया है। आज पत्रिका डॉट कॉम की ओर से बलराम यादव के राजनीतिक कैरियर के बारे में बताया जा रहा है :


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संस्थापक सदस्यों में हैं शामिल

बलराम यादव सपा के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। आजमगढ़ निवासी बलराम यादव ने विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में अपनी मौजूदगी का एहसास विपक्षी दलों को बराबर कराया। साथ ही कई महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री पद पर भी काम किया है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री के कार्यकाल के दौरान उनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे।


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बलराम यादव का राजनीतिक सफर
- वर्ष 1978 में पहली बार उन्होंने ब्लॉक प्रमुख चुनाव में सफलता प्राप्त की थी।

- साल 1980 में बलराम यादव ने पहली बार दमकिपा से विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन इस चुनाव में कॉग्रेस प्रत्याशी शम्भू सिंह ने हरा दिया।

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1984 में चौधरी चरण सिंह के लोकदल के टिकट पर बलराम यादव विधायक चुने गए। लोकदल के विघटन के दौरान वह मुलायम सिंह के साथ लोकदल बहुगुणा में जमे रहे। 1989 में जनता दल के टिकट पर दूसरी बार बलराम यादव को विधानसभा में जाने का अवसर मिला। इसके बाद मुलायम सिंह यादव के साथ समाजवादी पार्टी के गठन में बलराम यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पार्टी के स्थापना काल के सदस्य बनने का अवसर प्राप्त किया।

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- सपा के टिकट पर बलराम यादव ने 1991 और 1993 में सफलता हासिल की वही 1996 में बसपा प्रत्याशी विभूति निषाद ने उन्हें चुनाव में मात दी।

- चुनाव में हार के बाद मुलायम सिंह यादव ने बलराम यादव को विधान परिषद में भेजने का निर्णय लिया। 1998 में एमएलसी चुने गये।

- 2001 में विधानसभा चुनाव में सपा से दावेदारी पेश करते हुए अतरोलिया विधानसभा क्षेत्र से बलराम यादव विधायक चुने गए।

- इसके बाद 2007 में बसपा के सुरेन्द्र मिश्रा ने बलराम यादव को चुनाव में हरा दिया।


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- इसके बाद 2012 चुनाव में उन्होंने अपनी यह सीट अपने बेटे संग्राम यादव को दे दी और अतरौलिया विधान सभा क्षेत्र से संग्राम यादव सपा के टिकट पर विधायक चुने गए लेकिन 2010 में पार्टी ने उन्हें एक बार पुनः एमएलसी बना दिया। जिसका कार्यकाल इस माह जून में पूरा होने पर पार्टी के टिकट पर तीसरी बार उन्हें एमएलसी बनने का अवसर मिला।


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मंत्रिमंडल में हमेशा मिला उच्च स्थान

बलराम यादव को सपा की सरकार के मंत्रिमंडल में हमेशा ही उच्च स्थान दिया गया और पहली बार कैबिनेट में पंचायती राज मंत्री का ओहदा दिया गया। बाद में उन्हें स्वास्थ्य, पंचायती राज, कारागार व माध्यमिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग दिए गए। एमएलसी बनने के अभी चंद दिन बीते थे और जगह-जगह स्वागत कार्यक्रम चल ही रहा रहा था कि मंगलवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री के फैसले ने पार्टी के लोगों को स्तब्ध कर दिया।

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