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मायावती-अखिलेश के आरोपों के बाद शिवपाल की प्रसपा ने तुरंत किया पलटवार, कहा- कहीं बसपा चुनाव के बाद भाजपा से..

समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती द्वारा सीधे तौर पर शिवपाल यादव के भाजपा से मिले होने को आरोपों को प्रसपा (प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया) ने पूर्णतयः तथ्यहीन व बेबुनियाद बताया है।

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लखनऊ

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Abhishek Gupta

Jan 12, 2019

Shivpal Mayawati AKhilesh

Shivpal Mayawati AKhilesh

लखनऊ. समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती द्वारा सीधे तौर पर शिवपाल यादव के भाजपा से मिले होने को आरोपों को प्रसपा (प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया) ने पूर्णतयः तथ्यहीन व बेबुनियाद बताया है। शिवपाल यादव ने एक बयान में कहा है कि महागठबंधन बिना उनके अधूरा है। उन्होंने कहा कि छोटी और सेक्युलर पार्टियों जब तक एक नहीं होंगी तब तक बीजेपी के विजय रथ को रोक पाना मुमकिन नहीं है। वहीं प्रसपा द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि यह बताने की जरूरत नहीं है कि शिवपाल यादव का साम्प्रदायिक शक्तियों के खिलाफ पिछले 4 दशकों का संघर्ष किसी भी संदेह से परे हैं।

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मायावती वोट भाजपा की गोद में डाल चुकी हैं-

पार्टी ने कहा कि मायावती द्वारा यह भी आरोप लगाया गया कि भाजपा द्वारा शिवपाल को आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है, यह आरोप झूठा एवं निराधार है। यह सभी को पता है कि कौन लोग आर्थिक भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और कौन सी पार्टी में टिकट बेचे जाते हैं। अखिलेश यादव का जब जन्म भी नहीं हुआ था उसके पहले से ही उत्तर प्रदेश में शिवपाल यादव के भाजपा और साम्प्रदायिक शक्तियों के खिलाफ सबसे मुखर स्वर रहे हैं। अखिलेश को यह समझना चाहिए कि इसके पूर्व भी मायावती पिछड़ो व दलितों और मुसलमानों का वोट लेकर भाजपा की गोद में डाल चुकी हैं। ऐसे में कहीं यह न हो कि इतिहास फिर से स्वयं को दोहराए और मायावती चुनाव के बाद भाजपा से जा मिले। यह भी सबको पता है की राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन न कर बीजेपी को लाभ किसने पहुंचाया।

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यह मौका परस्ती का है गठबंधन-

सपा ने आज उस दल से गठबंधन किया है, जिसने हमेशा समाजवादी पार्टी खून से सींचने वाले मुलायम सिंह यादव, जनेश्वर मिश्र का अपमान किया है। यह मौका परस्ती का गठबंधन हैं। समाजवादी धारा से जुड़ा कोई कार्यकर्ता और समाज का गरीब, वंचित तबका इस गठबंधन को कभी स्वीकार नहीं करेगा। जहां तक इस गठबंधन पर प्रतिक्रिया का प्रश्न है उस पर अभी से नफा नुकसान पर कोई प्रतिक्रिया देना थोड़ी जल्दबाजी होगी। लोकसभा चुनाव करीब आते-आते यूपी की राजनीति में नए-नए समीकरण बनेंगे।

प्रसपा किसी गठबंधन का हिस्सा होने के लिए आतुर नहीं-

अपने निर्माण के सीमित अवधि में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने अपने व्यापक जनाधार व लोकप्रियता के बल पर यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि प्रसपा के आभाव में यूपी के पॉलिटिकल स्फीयर में साम्प्रदायिक शक्तियों व सत्ता के विरुद्ध किसी भी मंच, गठबन्धन या संघर्ष की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रसपा प्रदेश की एक बड़ी ताकत है, और साम्प्रदायिक शक्तियों के विरुद्ध सभी सीटों पर अकेले लड़ने में समर्थ है। प्रसपा किसी गठबंधन का हिस्सा होने के लिए आतुर नहीं है। यह सैद्धांतिक सहमति व सम्मान के आधार पर ही तय होगा। सेक्युलर मोर्चा में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी एवं बहुजन मुक्ति मोर्चा के साथ उत्तर प्रदेश की 40 से अधिक छोटी पार्टियां है जिसके सहयोग के बिना भाजपा को हराना असंभव होगा। यह मोर्चा अल्पसंख़्यकों, पिछडों एवं दलितों के हितों की रक्षा करने के लिए गठित किया है, जिसका प्रस्थान बिन्दु ही यह है कि जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी।