
जल्द खुलेगा महाभारत के लाक्षागृह का रहस्य, हंडिय़ा में महाभारत रिसर्च सेंटर खोलने का प्रस्ताव
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
प्रयागराज. योगी आदित्यनाथ सरकार महाभारत और रामायणकालीन पौराणिक स्थलों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में हंडिय़ा लाक्षागृह को बड़ा टूरिज्म स्पॉट बनाने की तैयारी है। लाक्षागृह पर्यटन स्थल विकास समिति ने यहां महाभारत रिसर्च सेंटर बनाने का प्रस्ताव दिया है। उप्र पर्यटन विभाग इस पर विचार कर रहा है। फिलहाल यहां एक सत्संग भवन का निर्माण और सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के कुछ शोधार्थी यहां के लाक्षागृह पर भी शोध कर रहे हैं।
प्रयागराज मुख्यालय से 40 किमी दूर हंडिया में एक सुरंग मिली थी। दावा किया गया कि यह वही सुरंग है जिससे पांडव लाक्षागृह से बचने के लिये निकले थे। करीब चार फिट चौड़ी इस सुरंग के बारे में मान्यता है कि इस सुरंग के रास्ते पांडव लाक्षागृह से निकलकर गंगा के उस पार चले गए थे। इतिहासकारों व शोधकर्ताओं ने केंद्र सरकार और आर्कियॉलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से इसकी खुदाई की मांग की थी।
इस संबंध में पर्यटन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर (पर्यटन) दिनेश कुमार का कहना है कि फिलहाल, लाक्षागृह के सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। यहां शोध स्थल का भी प्रस्ताव आया है। लाक्षागृह पर्यटन स्थल विकास समिति के संयोजक ओंकार नाथ त्रिपाठी का कहना है कि यहां महाभारत रिसर्च सेंटर की स्थापना होनी चाहिए। ताकि नई पीढिय़ों को इस जगह की ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के बार में जानकारी मिले। इस समिति का गठन 2011 में प्रयागराज के कुछ संत व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया था। इसके बाद से इलाहाबाद विवि के शोधार्थी यहां खुदाई करते रहते हैं। समय-समय पर कुछ न कुछ मिलता रहता है। जो अवशेष मिले हैं उन्हें संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। योगी सरकार ने जून में यहां सत्संग भवन के लिए 20 लाख रुपये की राशि जारी की थी। उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड निर्माण कार्य कर रहा है।
सुरंग खोलेगी लाक्षागृह का रहस्य
महाभारत काल में दुर्योधन द्वारा पांडवों को जिंदा जलाने के लिए गंगा नदी के तट पर लाख का महल तैयार कराया था। विदुर ने पांडवों को दुर्योधन की इस साजिश की जानकारी दी थी। इसके बाद पांडव सुरंग बनाकर चुपचाप बाहर निकल आए थे। लेकिन लाक्षागृह किस जगह था, इसका जिक्र नहीं है। चार-पांच जगह ऐसी हैं, जिसके महाभारत काल का लाक्षागृह होने का दावा किया जाता है। लेकिन हंडिय़ा के इस गांव का सरकारी रिकार्ड में भी नाम लाक्षागृह ही है। आर्कियॉलजिकल सर्वे आफ इंडिया ने इस जगह की खुदाई की थी। अब योगी सरकार इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर रही है।इतिहासकार और इलाहाबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी के मध्यकालीन इतिहास विभाग के हेड प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी कहना है कि यह गांव वही लाक्षागृह है या नहीं, इसका पता एएसआई की खुदाई व रिसर्च से ही चल सकता है।
Published on:
24 Sept 2020 06:49 pm

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