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अमेठी से ही लड़ेंगे राहुल, स्मृति देंगी चुनौती!

राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद अगले लोक सभा चुनाव में कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले रायबरेली-अमेठी को लेकर अब तस्वीर साफ हो गई है।

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rahul gandhi

लखनऊ.राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद अगले लोक सभा चुनाव में कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले रायबरेली-अमेठी को लेकर अब तस्वीर साफ हो गई है। राहुल गांधी का अमेठी से और सोनिया गांधी का रायबरेली से चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। बीते दिनों कयास लगाए जा रहे थे कि राहुल गांधी अपनी सीट बदलेंगे लेकिन प्रियंका गांधी के बयान से अब तस्वीर साफ हो गई है। प्रियंका ने कहा है कि रायबरेली से उनकी मां (सोनिया गांधी) ही लड़ेंगी।

रायबरेली से लड़ेंगी सोनिया

पिछले दिनों प्रियंका के भी चुनाव लड़ने की खबरें आईं थीं। माना जा रहा था कि सोनिया गांधी के रिटायरमेंट के बाद कांग्रेस को मजबूत करने के लिए प्रियंका गांधी अगला लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं लेकिन प्रियंका ने इन कयासों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा, “मेरे चुनाव लड़ने का सवाल ही नहीं है, मेरी मां रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी।” एक अन्य सवाल के जवाब में प्रियंका ने कहा, “अब तक मैंने जितनी भी महिलाओं को देखा है, उनमें मेरी मां सबसे बहादुर महिला हैं। उन्होंने बहुत सारी परेशानियों का सामना किया है।” इसके मायने यह लगाए जा रहे हैं कि प्रियंका पहले की तरह केवल अमेठी-रायबरेली में प्रचार करेंगी।

कांग्रेस का गढ़ हुआ कमजोर

बीते विधानसभा चुनाव व निकाय चुनाव में रायबरेली-अमेठी में कांग्रेस को कई सीटों हार का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी अमेठी में कई जनसभाएं कर कांग्रेस को जमकर घेरा है। माना जा रहा है कि इस बार भी अमेठी में बीजेपी से स्मृति ईरानी ही लड़ेंगी। ऐसे में कांग्रेस के लिए अपने गढ़ को बचाने की कठिन चुनौती होगी। इन दोनों जगहों पर पार्टी के तमाम नेताओं में आपसी फूट भी दिखी है।

प्रियंका बनाएंगी रणनीति

प्रियंका ने रायबरेली और अमेठी में पार्टी संगठन को काफी मजबूत बनाया, जिसकी वजह से आज जिला स्तर से लेकर बूथ स्तर तक कांग्रेसी सक्रिय हैं। इतना ही नहीं, प्रियंका रायबरेली-अमेठी से दिल्ली आने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर वहां के मतदाताओं से सीधे मुलाकात करती हैं. उनकी समस्याओं को सुनती हैं और उनकी हर समस्या हल करने की कोशिश करती हैं। यही वजह रही कि राहुल की ताजपोशी के दौरान प्रियंका पार्टी के बड़े नेताओं के संग बैठने के बजाए रायबरेली-अमेठी से आए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बैठीं। रायबरेली-अमेठी के लोगों को प्रियंका का यही अंदाज भाता है।